महिला क्रिकेट में नये युग की शुरुआत

women cricket : खेलों के इतिहास पर अगर नजर दौड़ायें, तो हर क्रांतिकारी बदलाव के पीछे एक सूत्रधार होता है. आने वाले समय में जब भारत में महिला क्रिकेट में आये बदलाव पर चर्चा होगी, तो जय शाह को इसके सूत्रधार के तौर पर याद किया जायेगा.

women cricket : अपने देश की जो महिलाएं घरों की रीढ़ थीं, अब वे पूरे देश में हो रहे बदलाव की धुरी बनकर सामने आ रही है. एक तरफ वे राज्य दर राज्य चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं, फाइटर जेट चलाने से लेकर इसरो में बड़ी भूमिका को अंजाम दे रही हैं, वहीं खेल के मैदान में भारतीय विकास की कहानी का इंजन बनकर सामने आ रही हैं. ओलिंपिक खेलों में तो भारतीय महिलाएं पहले से ही बदलाव का नेतृत्व कर रही थीं, लेकिन राष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी भूमिका अब तक बहुत महत्वपूर्ण नहीं थी. यह सच है कि क्रिकेट को भारत के खेलों में लगभग धर्म का दर्जा मिला है, लेकिन बीते पांच साल तक भी इस खेल में महिलाएं लगभग हाशिये पर थीं. अलबत्ता वर्ष 2025 ने यह तस्वीर पूरी तरह बदल कर रख दी.


खेलों के इतिहास पर अगर नजर दौड़ायें, तो हर क्रांतिकारी बदलाव के पीछे एक सूत्रधार होता है. आने वाले समय में जब भारत में महिला क्रिकेट में आये बदलाव पर चर्चा होगी, तो जय शाह को इसके सूत्रधार के तौर पर याद किया जायेगा. जय शाह जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के महासचिव थे, तब उन्होंने दो बड़े कदम उठाये थे, जिसने भारतीय महिला क्रिकेट में आमूलचूल बदलाव ला दिया. पहला, उन्होंने महिला क्रिकेट में पुरुष क्रिकेट के बराबर वेतन लाने का काम किया. और दूसरा, उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग की तर्ज पर विमेंस प्रीमियर लीग को अमली जामा पहनाने का काम किया. इन दोनों का नतीजा हाल ही में दिखा, जब भारतीय महिला टीम ने विश्व कप का खिताब जीता.

भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के लिए 1983 विश्व कप और 2007 में टी-20 वर्ल्ड कप की जीत जितनी विराट उपलब्धि थी, भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए इस साल विश्व कप में विजय उतनी ही बड़ी उपलब्धि रही है. इसका साफ असर इसके ठीक बाद विमेंस प्रीमियर लीग के लिए हुई नीलामी में दिखायी पड़ा. यह कहना तो खैर बेमानी होगा कि विमेंस प्रीमियर लीग की नीलामी का स्तर आंकड़ों और रणनीति के आधार पर इंडियन प्रीमियर लीग के बराबर हो चुका है, लेकिन इस साल की नीलामी से यह स्पष्ट है कि विमेंस प्रीमियर लीग बड़ी तेजी से उस ओर अग्रसर है. इस नीलामी में 73 रिक्त स्थानों के लिए 277 खिलाडियों का पूल था, जिनमें 194 भारतीय और 83 विदेशी महिला क्रिकेटर शामिल थीं. जाहिरा तौर पर अब भारतीय खिलाडियों का टैलेंट पूल बड़ा होता जा रहा है और फ्रेंचाइजी उन पर अधिक भरोसा भी दिखा रहे हैं.


विश्व कप में भारत की और से दमदार प्रदर्शन करने वाली ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा 3.2 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड राशि में बिकीं. दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया की सुपरस्टार एलिसा हेली का कोई खरीदार नहीं मिला. मुंबई इंडियंस और दिल्ली कैपिटल्स ने इस नीलामी में सबसे कम बजट के साथ एंट्री की, लेकिन ये दोनों सबसे मजबूत टीम के साथ ऑक्शन रूम से बाहर निकले. मुंबई इंडियंस ने अपनी पहचान के हिसाब से पूरा जोर अपने अहम खिलाडियों को दोबारा अपने कुनबे में शामिल करने पर लगाया. मुंबई इंडियंस ने जब एमिलिया केर को टीम में नहीं बनाये रखा था, तब उसकी काफी चर्चा हुई थी. लेकिन जैसे ही वह ऑक्शन टेबल पर आयीं, मुंबई इंडियंस ने उन्हें तीन करोड़ की बड़ी राशि देकर खरीदा.

मुंबई इंडियंस ने इसी तरह सजीवन साजना, शाबनीम इस्माइल और साइका इशाक को अपनी टीम में दोबारा शामिल किया. इन तीनों की ही मुंबई इंडियंस की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका रही थी. इसके अलावा मुंबई इंडियंस ने निकोला कैरी को शामिल कर अपनी टीम को और मजबूती दी. दिल्ली कैपिटल्स ने अपना पूरा दांव वुल्वार्ट, श्री चरनी और चिनले हेनरी पर लगाया. ये तीनों विश्व कप की महत्वपूर्ण खिलाड़ी थीं. दिल्ली कैपिटल्स के दांव को देखकर लगता है कि वुल्वार्ट या फिर जेमिमा रोड्रिग्स में से किसी एक पर कप्तानी का जिम्मा होगा.


रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने नीलामी में जोर अपनी बल्लेबाजी दमखम को बढ़ाने में लगाया. टीम ने ग्रेस हैरिस, जॉर्जिया वॉल और नदीन डी क्लर्क को खरीदकर अपनी रणनीति जाहिर कर दी. टीम के पास वस्त्राकर, लॉरेन बेल और अरुंधती रेड्डी के रूप में जबरदस्त पेस बैटरी है. इस टीम की स्पिन गेंदबाजी की कमान राधा यादव और लिंसी स्मिथ के हाथों में होगी. अगर हम यूपी वारियर्स की बात करें, तो भले ही ऑक्शन रूम में वह सबसे अधिक सक्रिय दिखे, लेकिन टीम के संतुलन को देखकर उन्हें निराशा ही होगी.

मेग लैनिंग और दीप्ति शर्मा में से कोई एक इस टीम की अगुवाई करेंगी, लेकिन टीम को विजेता बनाने के लिए जाहिर है, उन्हें खासी मशक्कत करनी होगी. इसी तरह गुजरात टाइटन्स को भी वह टीम नहीं मिली, जिसे वह जिताऊ कह सके. विमेंस प्रीमियर लीग का अगला विजेता चाहे जो भी टीम हो, लेकिन इतना तो स्पष्ट है कि भारत में महिला क्रिकेट का परिदृश्य पूरी तरह से बदल चुका है. अब महिलाएं भारतीय क्रिकेट की चीयर लीडर नहीं, बल्कि असली लीडर हैं. ये महिलाएं भारतीय क्रिकेट को पुरुषों के साथ मिलकर मैदान पर महाशक्ति बनाने में न सिर्फ सक्रिय भूमिका निभायेंगी, बल्कि क्रिकेट को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचायेंगी भी.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >