शांति बहाली के प्रयास

नागा सांस्कृतिक तौर पर बहुजातीय समूह हैं और सबकी अपनी-अपनी समस्याएं और मांगें हैं. ऐसे में सांस्कृतिक, ऐतिहासिक व भौगोलिक प्रभाव क्षेत्र को ध्यान में रखना आवश्यक है.

कई महीनों से जारी गतिरोध के बाद केंद्र सरकार ने फिर से सबसे बड़े नागा विद्रोही गुट एनएससीएन-आइएम के साथ वार्ता शुरू की है. दिमापुर में असम के मुख्यमंत्री हेमंता विस्वा सरमा ने एनएससीएन-आइएम के सचिव मुइवा और नागालैंड के मुख्यमंत्री निफियु रियो के साथ बंद कमरे में बैठक की. बैठक के बाद सरमा ने पूर्वोत्तर में स्थायी तौर पर शांति बहाली की उम्मीद जतायी.

स्पष्ट है कि केंद्र सरकार नागा मसले का जल्द और ठोस समाधान चाहती है. एनएससीएन-आइएम के आर रायसिंग ने भी केंद्र सरकार की इस पहल की तारीफ की है. हालांकि, कुछ दिन पहले ही वार्ता के लिए नियुक्त नागालैंड के राज्यपाल आरएन रवि का स्थानांतरण कर दिया गया. रवि और एनएससीएन-आइएम के बीच संबंध काफी तनावपूर्ण हो चुके थे.

वार्ता में ठहराव आने की एक अहम वजह यह भी थी. दूसरा, नागालैंड में सर्वदलीय सरकार के आधिकारिक गठन के बाद वार्ता शुरू हुई है, ताकि नागा समस्या का स्थायी समाधान हो सके. केंद्र सरकार की तरफ से अभी नये वार्ताकार की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद है कि यह जिम्मेदारी इंटेलीजेंस ब्यूरो के विशेष निदेशक रहे एके मिश्रा को दी जा सकती है, क्योंकि वे इस वार्ता में शामिल रहे और उन्होंने दिमापुर में मुइवा और सरमा से अलग-अलग मुलाकात भी की.

भारत में सबसे लंबे समय से जारी इस विद्रोह में ऐसे कई मुकाम आये, जहां दोनों पक्ष स्थायी शांति बहाली पर सहमत हुए. साल 1997 में केंद्र द्वारा एनएससीएन-आइएम के साथ सीजफायर समझौता किया गया था. साल 2015 में मोदी सरकार ने नये सिरे से वार्ता शुरू की. उसके बाद से सात अन्य नागा सशस्त्र संगठन नागा नेशनल पॉलिटिकल ग्रुप्स के बैनर तले वार्ता में शामिल हो चुके हैं. एनएससीएन-आइएम द्वारा अलग नागा झंडे और संविधान की मांग के चलते अक्तूबर, 2019 के बाद से अंतिम समझौते को लेकर गतिरोध बना, जिससे औपचारिक वार्ता बंद हो गयी.

अब दोबारा वार्ता शुरू होने से उम्मीद जगी है कि इस मसले का स्थायी और दूरगामी समाधान निकल सकेगा. सभी पक्षकारों को साथ लाकर समुचित हल निकालना होगा, ताकि दोनों पक्षों के लिए आदर्श स्थिति उत्पन्न हो सके. आज नागा युवा लंबे अरसे से चले आ रहे मसले को सुलाझने के लिए ज्यादा उत्सुक हैं. केंद्र सरकार-नागा विवाद यह दर्शाता है कि पूर्व में हुए कई समझौते इसलिए टूट गये, क्योंकि पक्षों द्वारा अपनी सुविधा के मुताबिक प्रावधानों की व्याख्या की गयी. चूंकि, नागा सांस्कृतिक तौर पर बहुजातीय समूह हैं और सबकी अपनी-अपनी समस्याएं और मांगें हैं.

ऐसे में दीर्घकालिक समाधान के लिए उनके सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और भौगोलिक प्रभाव क्षेत्र को ध्यान में रखना आवश्यक है. नागा हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिससे सामाजिक-राजनीतिक सद्भाव बने, आर्थिक तरक्की हो और सभी जनजातियों और राज्य के नागरिकों का जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.

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Published by: संपादकीय

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