शिक्षक नियुक्ति का मजाक क्यों ?

काफी जद्दोजहद के बाद झारखंड सरकार ने शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दिया है. अलग-अलग जिलों मे नियुक्ति के लिए टेट पास उम्मीदवारों से ओवेदन मांगे जा रहे हैं, लेकिन इसमे इतनी त्रुटियां है कि शायद ही नियुक्ति हो पाये. इस नियुक्ति मे कई और खामियां हैं, जैसे क्षेत्रीय भाषा के अनुसार एक-एक आवेदक कई […]

काफी जद्दोजहद के बाद झारखंड सरकार ने शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दिया है. अलग-अलग जिलों मे नियुक्ति के लिए टेट पास उम्मीदवारों से ओवेदन मांगे जा रहे हैं, लेकिन इसमे इतनी त्रुटियां है कि शायद ही नियुक्ति हो पाये. इस नियुक्ति मे कई और खामियां हैं, जैसे क्षेत्रीय भाषा के अनुसार एक-एक आवेदक कई जिलों में आवेदन कर सकता है और जिनका नंबर ज्यादा होगा उनका चयन किया जायेगा, लेकिन प्रतीक्षा सूची नहीं बनायी जायेगी.

इससे साफ जाहिर होता है कि हर आवेदक हर जिले में आवेदन देगा और जिनका नंबर ज्यादा है उसका चयन हर जिले में हो जायेगा. लेकिन चयनित उम्मीदवार सिर्फ एक जिले में योगदान देंगे, चूंकि प्रतीक्षा सूची नहीं बनायी जायेगी तो 90 प्रतिशत सीटें निश्चित रूप से खाली रह जाएगी. क्या सरकार की मंशा सीटें खाली रखने की है?

इमरान आलम, पचंबा, गिरिडीह

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