खास बातें
West Bengal Election 2026 Firsts: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 हो चुके हैं. एक दिन (रविवार) के बाद चुनाव परिणाम आ जायेंगे. इस बार के चुनाव ने राज्य के राजनीतिक इतिहास में कई ऐसे अध्याय जोड़े, जो पहले कभी नहीं देखे गये. यह केवल सत्ता के लिए दो बड़ी पार्टियों की लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह पहली बार (Firsts) होने वाली कई घटनाओं का गवाह बना. हाई-स्टेक्स वाले इस मुकाबले में न केवल वोटिंग के रिकॉर्ड टूटे, बल्कि चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों की रणनीतियों ने भी नया इतिहास रचा.
रिकॉर्डतोड़ वोटिंग और महिला शक्ति का उदय
बंगाल चुनाव के इस सीजन में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद अगर सबसे ज्यादा सुर्खियों में कुछ रहा, तो वह था मतदान प्रतिशत. 92 प्रतिशत से अधिक वोटिंग ने एक रिकॉर्ड कायम कर दिया. हालांकि, 2013 में त्रिपुरा में हुए मतदान के रिकॉर्ड को बंगाल इस बार भी नहीं तोड़ पाया.
- बंगाल में 92 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ, जो स्वतंत्रता के बाद राज्य का सबसे बड़ा आंकड़ा है.
- चुनाव आयोग के मुताबिक, महिलाओं ने मतदान केंद्रों पर पुरुषों को पीछे छोड़ दिया. ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं और सुरक्षा के वादों के बीच महिलाओं की यह लंबी कतारों ने सत्ता का भविष्य तय कर दिया है.
बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
तकनीक और सुरक्षा का डिजिटल पहरा
बंगाल चुनाव 2026 (West Bengal Assembly Elections 2026) में पहली बार चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने तकनीक का ऐसा इस्तेमाल किया, जिसने गड़बड़ी की गुंजाइश को न्यूनतम कर दिया.
- QR कोड एंट्री : मतगणना केंद्रों और पोलिंग एजेंटों के लिए पहली बार क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र अनिवार्य किये गये हैं.
- 24 X 7 लाइव वेबकास्टिंग : बंगाल के लगभग हर संवेदनशील बूथ की लाइव निगरानी सीधे दिल्ली और कोलकाता के कंट्रोल रूम से की गयी.
- एआई (AI) का उपयोग : फेक न्यूज और डीपफेक वीडियो को रोकने के लिए आयोग ने पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया.
इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव में सबसे बड़ा धमाका, फालता विधानसभा की पूरी वोटिंग रद्द, सभी 285 बूथों पर 21 मई को फिर से वोट
बदलते सियासी समीकरण में थर्ड जेंडर की भागीदारी
इस चुनाव में सामाजिक समावेश की भी एक नयी तस्वीर उभरकर सामने आयी. पहली बार तृतीय लिंग (Third Gender) समुदाय के मतदाताओं ने 91 प्रतिशत से अधिक की दर से मतदान किया. यह बंगाल की बदलती सामाजिक और राजनीतिक चेतना का परिचायक है.वोटिंग माइग्रेशन के आरोपों के बीच, पहली बार इतनी बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक केवल वोट डालने के लिए अपने घर लौटे.
प्रचार का बदला स्वरूप, रैलियों से ज्यादा रील्स पर जोर
बंगाल चुनाव 2026 में परंपरागत बड़ी रैलियों के साथ-साथ डिजिटल वॉर रूम्स का प्रभाव बढ़ा. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सुनील बंसल और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अभिषेक बनर्जी के बीच का यह ‘ब्रेन गेम’ सोशल मीडिया के जरिये सीधे युवाओं के मोबाइल तक पहुंचा. पहली बार इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग का चुनावी प्रचार में खुलकर इस्तेमाल हुआ.
