लाठी चलाने में माहिर और ड्रैगन फ्रूट की खेती का विचार, जानें बीजेपी के ‘गेमचेंजर’ दिलीप घोष की अनसुनी दास्तां

Dilip Ghosh Bengal Election 2026: बंगाल बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष की रोमांचक जीवन कहानी. क्यों वह 'ड्रैगन फ्रूट' की खेती करना चाहते थे और कैसे बने बंगाल की राजनीति के गेमचेंजर. देखें एक्सक्लूसिव रिपोर्ट.

Dilip Ghosh Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जब भी ‘धुआंधार’ बयानबाजी और जमीन पर डटकर लड़ने की बात आती है, तो एक ही नाम सबसे पहले जेहन में आता है- दिलीप घोष. बचपन में अपनी शरारतों से घर वालों की नाक में दम करने वाले दिलीप घोष बंगाल बीजेपी के सबसे ‘आक्रामक’ चेहरा माने जाते हैं.

आरएसएस के प्रचारक से बीजेपी का चेहरा बने

62 वर्षीय दिलीप घोष का जीवन किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. आरएसएस के प्रचारक से बंगाल में बीजेपी का चेहरा बनने तक, उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. अब 2026 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर अपने पुराने तेवर और ‘हाई जोश’ के साथ मैदान में उतर चुके हैं.

शून्य से शिखर तक : बंगाल बीजेपी के ‘असली’ गेमचेंजर

दिलीप घोष की राजनीतिक यात्रा ने बंगाल में भगवा दल की दिशा ही बदल दी. कुछ ही सालों में उन्होंने 4 प्रतिशत वाली बीजेपी को 38 प्रतिशत तक पहुंचाने का कारनामा कर दिखाया. अंडमान में सुनामी का कहर हो या बंगाल के चुनावी दंगल में हिंसा, दिलीप घोष कभी पीछे नहीं हटे. वह अपना नारा खुद ही बुलंद करते हैं- हाउ इज द जोश? दिलीप घोष!

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हार के बाद वापसी

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली हार और अध्यक्ष पद छिनने के बाद उनके करियर पर ग्रहण लगता दिख रहा था. लेकिन बंगाल की राजनीति में शमिक भट्टाचार्य का दौर शुरू होते ही दिलीप घोष फिर से मुख्यधारा में लौट आये हैं.

लाठी और तलवार के उस्ताद, नहीं बदला अंदाज

दिलीप घोष केवल शब्दों से ही नहीं, बल्कि शारीरिक रूप से भी काफी सक्रिय और मजबूत माने जाते हैं. आज भी वह लाठी चलाने और तलवारबाजी में माहिर हैं. वह अक्सर कार्यकर्ताओं के साथ लाठी खेलते नजर आते हैं. मार्शल आर्ट्स का उन्हें शौक है. उनके बयानों से अक्सर विवाद पैदा होता है, लेकिन वह अपनी बात पर अडिग रहने के लिए जाने जाते हैं. वह कहते हैं कि उन्हें कड़वा सच बोलने में कोई झिझक नहीं है.

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निजी जिंदगी का रोमांच : शादी से दूरी और फिर वापसी

दिलीप घोष के निजी जीवन में भी काफी दिलचस्प मोड़ आये हैं. राजनीतिक व्यस्तता और प्रचारक के रूप में काम करने के कारण वह लंबे समय तक अपने परिवार और वैवाहिक जीवन से दूर रहे. लेकिन समय के साथ उनके जीवन में कई व्यक्तिगत बदलाव भी आये. अब वह फिर से पूरी ऊर्जा के साथ चुनावी शोर में लौट आये हैं.

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Dilip Ghosh: कभी ड्रैगन फ्रूट की खेती करने का था विचार

दिलीप घोष के बारे में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोग जानते हैं. राजनीति के उतार-चढ़ाव के बीच एक समय वह इतने निराश हो गये कि उन्होंने सब कुछ छोड़कर खेती करने का मन बना लिया. गंभीरता से ‘ड्रैगन फ्रूट’ की खेती शुरू करने की योजना बना रहे थे. वह खाली समय में बागवानी करना पसंद करते हैं. हालांकि, अब उनका भरोसा फिर से ‘कमल’ (पद्म) पर लौट आया है. चाय की चुस्कियों के साथ राजनीति के जटिल समीकरणों को सुलझाने वाले दिलीप घोष इस बार विधानसभा चुनाव में क्या कमाल करते हैं, इस पर पूरे बंगाल की नजरें टिकी हुई हैं.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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