5जी सेवाओं की शुरुआत

डिजिटल जुड़ाव का दायरा बढ़ने और गहरा होने से स्टार्टअप कम्युनिटी मजबूत होगी और विभिन्न क्षेत्रों में नये अवसर बनेंगे.

5जी अगली पीढ़ी की ऐसी सेलुलर तकनीक है, जो अल्ट्रा लो-लेटेंसी के साथ तेज और अधिक विश्वसनीय संचार की सुविधा प्रदान करती है. एक सरकारी पैनल का दावा है कि 5जी के साथ उच्चतर नेटवर्क डेटा स्पीड दो से 20 गीगाबिट प्रति सेकेंड (जीबीपीएस) की रेंज में होगी. भारत में 4जी लिंक स्पीड औसतन छह से सात मेगाबिट प्रति सेकेंड (एमबीपीएस) ही है, जबकि विकसित देशों में यह स्पीड औसतन 25 एमबीपीएस तक है.

हाल ही में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया है कि साल के अंत तक 20 से 25 शहरों में 5जी कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी. इसकी कीमत भी वैश्विक औसत से कम रहने का अनुमान है. जुलाई में 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी प्रक्रिया शुरू होगी और उम्मीद है कि अगस्त-सितंबर तक पहले चरण की प्रक्रिया पूरी हो जायेगी. वर्तमान में भारत की इंटरनेट डेटा दर दो डॉलर (155 रुपये) है, जबकि वैश्विक औसत दर 25 डॉलर (1900 रुपये) है.

कुछ टेलीकॉम कंपनियों का मानना है कि भारत में 5जी और 4जी टैरिफ में ज्यादा अंतर नहीं आयेगा. हालांकि, अंतिम लागत स्पेक्ट्रम नीलामी के बाद ही स्पष्ट हो पायेगी. जिन देशों में 5जी नेटवर्क संचालित है, वहां ऑपरेटरों ने दरों में कोई विशेष बदलाव नहीं किया है. भारत की प्रतिमाह औसत डेटा खपत 18 जीबी है, जबकि वैश्विक खपत 11 जीबी ही है, यानी डेटा खपत के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में से है. हालांकि, ओकला स्पीडटेस्ट ग्लोबल इंडेक्स में वैश्विक औसत से भारत काफी नीचे है.

इस पर भारत को महत्तम प्रयास करने की जरूरत है. 5जी तकनीक तीन बैंड- लो, मिड और हाइ फ्रिक्वेंसी स्पेक्ट्रम पर काम करती है. लेटेंसी कम होने से नये एप्लीकेशन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का तीव्र विस्तार होगा. साथ ही, खेल आयोजनों और समाचार कार्यक्रमों के दौरान होनेवाले लोड स्पाइक्स के प्रभाव में कमी आयेगी.

डिजिटल जुड़ाव का दायरा बढ़ने और गहरा होने से स्टार्टअप कम्युनिटी मजबूत होगी और विभिन्न क्षेत्रों में नये अवसर बनेंगे. वायरलेस तकनीकों से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव की चिंता जाहिर की जाती है. लेकिन, बहुत सारे शोध में ऐसे किसी प्रतिकूल प्रभाव की बात स्पष्ट नहीं है. आईटी मंत्री ने भी 5जी टॉवर के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड रेडिएशन की चिंताओं को दूर किया है.

उनका दावा है कि अन्य देशों के मुकाबले भारत में इसके लिए अधिक कठोर मानदंड हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में 5जी से 2035 तक एक ट्रिलियन डॉलर का संचयी आर्थिक प्रभाव होगा. इसकी वजह है कि 5जी आईओटी, मशीन-टू-मशीन कम्युनिकेशन जैसी उभरती तकनीकों का आधार बन सकती है.

वहीं, यातायात अवसंचरना, विनिर्माण, कृषि जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में यह क्रांतिकारी परिवर्तन लायेगी. इसे डिजिटल इंडिया मुहिम से जोड़ने की आवश्यकता है, जिससे देश का नवाचार और विकासशील समाज अधिक सशक्त महसूस करे, तभी इन तकनीकों का सर्वव्यापी लाभ हो सकेगा.

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Published by: संपादकीय

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