क्या सिर्फ बोलने से रुकेगा भ्रष्टाचार?

सुधार के लिए व्यापक बदलाव, नयी सोच, दृढ़संकल्प और इच्छाशक्ति की जरूरत होती है. सिर्फ बातों से कुछ नहीं होता. सुधारक हमेशा अपने मजबूत तंत्र के बलबूते ही आगे बढ़ता है. झारखंड में भ्रष्टाचार पुराना मुद्दा रहा है. वर्तमान में गंठबंधन सरकार के मुखिया हेमंत सोरेन ने जिस दिन से शपथ ली है, भ्रष्टाचार के […]

सुधार के लिए व्यापक बदलाव, नयी सोच, दृढ़संकल्प और इच्छाशक्ति की जरूरत होती है. सिर्फ बातों से कुछ नहीं होता. सुधारक हमेशा अपने मजबूत तंत्र के बलबूते ही आगे बढ़ता है. झारखंड में भ्रष्टाचार पुराना मुद्दा रहा है. वर्तमान में गंठबंधन सरकार के मुखिया हेमंत सोरेन ने जिस दिन से शपथ ली है, भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार बोल रहे हैं. मुख्यमंत्री को शपथ लिये 100 दिन बीत गये हैं, लेकिन आज तक एक भी भ्रष्टाचारी पकड़ा गया क्या?

नयी सरकार में हेमंत सोरेन को भ्रष्टाचार विरोधी आइकॉन के रूप में प्रचारित किया जा रहा है. लगातार अखबारों में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की ओर से नये-नये नारे दिये जा रहे हैं. पर भ्रष्टाचार मिटाने के लिए सरकार का संकल्प कहीं दिख नहीं रहा. सरकार के पास भ्रष्टाचार निरोधक कई विभाग हैं. अकेले निगरानी के पास कई मामले लटके हैं. लेकिन, इन 100 दिनों में भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या मुख्यमंत्री ने कोई उच्चस्तरीय बैठक बुलायी? अगर जमीन के बैनामा में रिश्वत लिये जाने की बात मुख्यमंत्री बोल रहे हैं, तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? ऐसे मुद्दे पर कार्रवाई कौन करेगा? व्यवस्था के शीर्षतम पद पर आसीन मुख्यमंत्री अगर बोलने के साथ-साथ कार्रवाई करते हैं, तो निश्चित रूप से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी.

हाल के दिनों में मध्य प्रदेश, पड़ोसी राज्य बिहार व राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के यहां भ्रष्टाचार निरोधक दस्ते ने छापेमारी कर करोड़ों की अवैध संपत्ति बटोरने के मामलों का परदाफाश किया. झारखंड में ऐसे कदम क्यों नहीं उठाये जा रहे? देखा जाये तो इस गंठबंधन की सरकार में कई मंत्री ऐसे हैं, जिन पर भ्रष्टाचार का मामला चल रहा है. ऐसे में मुख्यमंत्री करें भी तो क्या? सरकार का चलाना पहली प्राथमिकता मान कर ही शायद मुख्यमंत्री सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलना ही मुनासिब समझ रहे हैं. लेकिन, एक बात यह भी है कि इस युवा मुख्यमंत्री से झारखंड के लोगों की बड़ी अपेक्षा है. हेमंत सोरेन को कथनी के साथ-साथ करनी पर भी विश्वास दिलाना होगा. कम समय में अगर राज्य से भ्रष्टाचार को सफाया करने के लिए कोई उचित कदम उठाते हैं, तो यह उनके राजनीतिक जीवन में मील का पत्थर साबित होगा.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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