खास बातें
Dipsita Dhar North Dum Dum: आमी एक यायावर… यानी मैं एक यायावर हूं… मशहूर गायक भूपेन हजारिका के ये बोल सीपीएम की फायरब्रांड युवा नेता दीप्सिता धर के राजनीतिक जीवन पर बिल्कुल सटीक बैठते हैं. 32 वर्षीय दीप्सिता का चुनावी सफर किसी खानाबदोश की तरह रहा है. 2021 में बाली विधानसभा, 2024 में श्रीरामपुर लोकसभा और अब 2026 में उत्तर दमदम विधानसभा से ताल ठोक रही हैं. जेएनयू (JNU) से अपनी राजनीति की धार तेज करने वाली दीप्सिता के दादा पद्मनीधि धर कभी सीपीएम के विधायक थे, लेकिन दीप्सिता के लिए चुनावी राजनीति में अभी बड़ा धमाका करना बाकी है.
अनोखा चुनाव प्रचार : दीदी नहीं, अब DD को बोलो
उत्तर दमदम के चुनावी मैदान में दीप्सिता ने प्रचार का एक डिजिटल और अनोखा तरीका निकाला है. ममता बनर्जी के ‘दीदी के बोलो’ की तर्ज पर दीप्सिता ने अपने नाम और सरनेम के शुरुआती अक्षरों को मिलाकर कैंपेन शुरू किया है ‘DD के बोलो’ यानी ‘डीडी को बोलो’.
भवानीपुर से चुनाव लड़ने से इनकार?
सियासी गलियारों में चर्चा है कि उन्हें पहले भवानीपुर विधानसभा सीट से बंगाल की चीफ मिनिस्टर और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी के खिलाफ लड़ने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. हालांकि, पार्टी ने इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगायी.
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विज्ञापन जैसा टैगलाइन बन गया दिप्सिता का चुनावी मंत्र
सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों ने उनकी फोटो के साथ लिखा- आंख बंद करके भरोसा किया जा सकता है. समर्थकों को शायद यह नहीं पता कि यह किसी मशहूर उत्पाद की टैगलाइन है, लेकिन दीप्सिता के लिए यह चुनावी मंत्र बन गया.
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450 रुपए की बैग पर ‘लुई विटों’ का लोगो
दीप्सिता धर हाल ही में एक ऐसी कंट्रोवर्सी में फंस गयीं थीं, जिसने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया था. एक तस्वीर में दीप्सिता के हाथ में महंगे फ्रांसीसी ब्रांड लुई विटों (Louis Vuitton) के लोगो वाला बैग दिखा. फेसबुक पर ट्रोलर्स ने उन्हें ‘सर्वहारा की पार्टी’ की अमीर नेता बताते हुए घेर लिया.
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बैग का निकला सरोजिनी मार्केट का कनेक्शन
विवाद बढ़ा, तो पता चला कि वह बैग पेरिस से नहीं, बल्कि दिल्ली के सरोजिनी मार्केट से खरीदी गयी था. इसकी कीमत मात्र 450 रुपए थी. इसके बाद लोगों ने उन्हें मजाक में ‘गरीबों की महुआ मोईत्रा’ कहना शुरू कर दिया. दीप्सिता को असल में एक ऐसे भारतीय ब्रांड के बैग का शौक है, जो दलित कलाकारों के श्रम से जुड़ा है. हालांकि, उन्होंने उसे अभी तक खरीदा नहीं है.
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बिल्लियों से प्यार और अकाल मृत्यु का गम
राजनीति की तल्खियों के बीच दीप्सिता का एक कोमल पक्ष भी है. उन्हें बिल्लियां पालने का बहुत शौक है. वह अक्सर उन्हें अपने साथ रखती थीं, लेकिन हाल ही में उन्होंने अपनी दोनों पालतू बिल्लियों को अकाल मृत्यु के कारण खो दिया, जिसका गम उन्हें आज भी है.
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Dipsita Dhar North Dum Dum: नागासाकी दिवस पर हुआ डीडी का जन्म
नागासाकी दिवस (9 अगस्त) को जन्मी दीप्सिता क्या इस बार उत्तर दमदम में अपनी जीत का धमाका कर पायेंगीं, यह देखना दिलचस्प होगा. पद्म (बीजेपी) की घोर विरोधी यह ‘पद्मनीधि’ की पोती अब लाल झंडे को उसकी पुरानी जमीन दिलाने के लिए पसीना बहा रही हैं.
