30 साल बाद विधानसभा के रण में, श्मशान में काटी थी रातें, मछली भूनकर खाया, जानें मुर्शिदाबाद के ‘रॉबिनहुड’ की अनसुनी दास्तां

Adhir Ranjan Chowdhury Election 2026: कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी 30 साल बाद विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं. पुलिस से बचने के लिए श्मशान में रातें बिताने और मछली भूनकर खाने वाले अधीर के जीवन के अनसुने किस्से पढ़ें इस रिपोर्ट में.

Adhir Ranjan Chowdhury Election 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘मुर्शिदाबाद के सुल्तान’ कहे जाने वाले अधीर रंजन चौधरी एक बार फिर इतिहास दोहराने की राह पर हैं. ठीक 30 साल पहले उन्होंने पहली बार विधानसभा की दहलीज लांघी थी. अब तीन दशक बाद वह फिर से विधायक बनने की जंग में हैं.

1996 में पहली बार नबग्राम से जीते थे अधीर

1996 में जब वह नबग्राम से जीते थे. तब वह पुलिस से बचने के लिए जिले से बाहर थे. आज समय बदल गया है, लेकिन 70 वर्षीय अधीर का जज्बा और चुनौतियां आज भी वैसी ही हैं. लोकसभा चुनाव में यूसुफ पठान से मिली शिकस्त के बाद, उन्होंने हार नहीं मानी है. अब बहरमपुर की अपनी घरेलू पिच पर नयी पारी खेलने को तैयार हैं.

जब अधीर की आवाज ने जिताया था चुनाव

अधीर रंजन चौधरी का राजनीतिक सफर किसी फिल्मी कहानी जैसा रोमांचक है. 1996 में वामपंथी शासन के दौरान पुलिस उन्हें तलाश रही थी. कांग्रेस नेता सोमेन मित्रा ने उन्हें सुरक्षित ठिकाने पर छिपाया था. अधीर खुद प्रचार करने नहीं जा सके, लेकिन उनके भाषणों की रिकॉर्डिंग गांवों में सुनायी गयी और लोगों ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुन लिया.

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सांसद से फिर विधायक तक का सफर

1999 में उन्होंने बहरमपुर लोकसभा सीट पर कब्जा किया और लगातार जीतते रहे. 2024 में उन्होंने उन्होंने कहा था कि अगर चुनाव हार गये, तो हारे राजनीति छोड़कर बादाम बेचेंगे, लेकिन जनता के प्यार ने उन्हें फिर से चुनावी मैदान में खींच लिया.

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जेल में जिसने इलाज किया, वही बना चुनावी विरोधी

अधीर रंजन चौधरी के जीवन में विडंबनाओं की कमी नहीं है. 1994 में एक हत्या के मामले में अधीर को बहरमपुर जेल में रहना पड़ा था. जेल में वह बीमार पड़ गये. तब डॉक्टर निर्मल चंद्र साहा ने उनका इलाज किया था. दिलचस्प बात यह है कि पिछले लोकसभा चुनाव में वही डॉक्टर साहा बीजेपी के टिकट पर अधीर के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे.

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Adhir Ranjan Chowdhury Election 2026: अधीर का श्मशान वाला सीक्रेट

अधीर रंजन के संघर्ष के दिनों की एक ऐसी सच्चाई है, जिसे सुनकर हर कोई दंग रह जाता है. 1994 में एक सीपीआईएम कार्यकर्ता की हत्या के आरोप में जब उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ, तो वह पुलिस से बचने के लिए तारापीठ श्मशान में छिप गये. पेट भरने के लिए मछली भूनकर खाते थे. वह दौर उनके जीवन का सबसे कठिन समय था, जिसने उन्हें और मजबूत बना दिया.

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सिगरेट छोड़ी, अब च्युइंग गम से भी तौबा

70 की उम्र में भी अधीर रंजन खुद को बेहद फिट रखते हैं. डेढ़ दशक पहले तक धूम्रपान करते थे. एक बार जब सिगरेट छोड़ी, तो फिर कभी कभी स्मोकिंग नहीं की. वह च्युइंग गम चबाने लगे. अब उन्होंने उसे भी पूरी तरह बंद कर दिया है. मुर्शिदाबाद की राजनीति में अधीर का कद ऐसा है कि उन्हें चाहने वाले आज भी उन्हें अपना ‘रॉबिनहुड’ मानते हैं.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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