मानव जाति ने तरक्की की इतनी सीढ़ी चढ़ ली है, जिसकी कल्पना आज से 50 साल पहले किसी ने नहीं की थी. मानव जीवन मशीनों का दखल इतनी तेजी से बढ़ा है कि इसके बिना रोज का काम नहीं चल सकता है. पृथ्वी से लेकर ब्रह्मांड तक के अनसुलझे रहस्य को भी सुलझाने का मनुष्य प्रयास कर रह है.
मानव जाति पर आधुनिकता का नशा इतना चढ़ा है कि आज वह खुद अपना विकल्प के तौर पर मशीनों में जान डालकर जैव विविधता में एक नयी प्रजाति को ही बना डाला. वह रोबोट है. आज कई देशों में रोबोट मानव के क्रियाकलापों में सहयोग कर रहे हैं. यहां तक कि उनको मानव के स्थान पर भी देखा जा रहा है. मानव के गतिविधियों में मशीनों का बढ़ता हस्तक्षेप मनुष्य के शरीर को पंगु न बना दे.
अभिनव कुमार, लोहिया नगर (बेगूसराय)
