अप्रासंगिक हो रहा सीओपी 25

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सीओपी 25 सम्मेलन की शुरुआत ही चुकी है. इस बार के सम्मेलन का मुख्य मकसद बढ़ते प्रदूषण के मुद्दों पर बातचीत करना और यह पड़ताल करना है कि अब तक जो निर्णय लिये गये हैं, उन पर हम कितने खरे उतरे हैं. वर्ष 2015 में पेरिस में हुए जलवायु […]

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सीओपी 25 सम्मेलन की शुरुआत ही चुकी है. इस बार के सम्मेलन का मुख्य मकसद बढ़ते प्रदूषण के मुद्दों पर बातचीत करना और यह पड़ताल करना है कि अब तक जो निर्णय लिये गये हैं, उन पर हम कितने खरे उतरे हैं.
वर्ष 2015 में पेरिस में हुए जलवायु परिवर्तन समझौते में यह तय हुआ था कि सभी मुख्य देश अपने कार्बन उत्सर्जन पर अंकुश लगायें. मगर अफसोस कि ऐसा हो नहीं पाया. इसका परिणाम पूरे विश्व में देखा जा सकता है. प्रदूषण बढ़ा, गर्मी बढ़ी, नदियां सूखीं, समुद्र के तापक्रम बढ़े और ग्लेशियर भी पिघले. इसलिए कहा जा रहा है कि सीओपी 25 सम्मेलन अपनी प्रासंगिकता खो रही है.
अमर कुमार यादव, धनबाद, झारखंड

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar digital desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >