गर्म होती पृथ्वी के खतरे

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की 10वीं वार्षिक रिपोर्ट को एक वार्निंग की तरह लेना चाहिए. हमारी पृथ्वी के संदर्भ में यह रिपोर्ट पूरी तरह से नकारात्मक है. इस रिपोर्ट की मानें, तो कुछ सालों बाद यहां जीवन संभव ही नहीं रह जायेगा. अगर ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन अभी कम नहीं किया गया, तो […]

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की 10वीं वार्षिक रिपोर्ट को एक वार्निंग की तरह लेना चाहिए. हमारी पृथ्वी के संदर्भ में यह रिपोर्ट पूरी तरह से नकारात्मक है.
इस रिपोर्ट की मानें, तो कुछ सालों बाद यहां जीवन संभव ही नहीं रह जायेगा. अगर ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन अभी कम नहीं किया गया, तो हम पेरिस समझौते के लक्ष्य से कहीं ज्यादा उत्सर्जन कर देंगे. इसका परिणाम होगा वैश्विक तापमान में भारी वृद्धि.
ऊर्जा के लिए कोयला, तेल और गैस का ज्यादा इस्तेमाल तापमान वृद्धि के लिए कारण हैं. इससे कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन बढ़ जाता है, जिससे पृथ्वी के तापमान में वृद्धि होने लगती है. पृथ्वी गर्म होने से कहीं सूखा, तो कहीं बाढ़ की तबाही आ रही है. इस विषय को हमें गंभीरता से लेनी चाहिए.
अमर यादव, पटना, बिहार

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar digital desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >