यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 40 फीसदी अन्न की बड़ी बर्बादी आज भी जारी है. यह बड़े दुख, दुर्भाग्य और शर्म की बात है. यही नहीं दूसरी ओर देश का हर दूसरा बच्चा कुपोषण का भी शिकार है और देश में 244 करोड़ रूपये का भोजन प्रतिदिन व्यर्थ ही चला जाता है.
अंग्रेजी के एक कहावत के अनुसार किसी वस्तु की बचत और उसका सही संरक्षण भी उसका एक तरह का उत्पादन है. इसलिए इस गंभीर समस्या पर तुरंत कुछ ठोस पहल करने की जरूरत है.
बड़ी अजीब बात तो यह है कि बड़ी मेहनत और खून पसीने की गाढ़ी कमाई की बड़ी बर्बादी आज के वैज्ञानिक और तकनीकी युग में भी कदर जारी है. इससे हमारे प्रशासन और संबंधित लोगों के बड़े दावों की पोल खुलती है. इसलिए अब सरकार को इस पर कुछ ठोस और पारदर्शी उपाय तुरंत करने की जरूरत है, जो देश अपने उत्पादन की ठीक से रक्षा तक नहीं कर सकता वह कैसे आगे बढ़ सकता है.
वेद मामूरपुर ,नरेला
