सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण प्रदान करनेवाला बिल पर राष्ट्रपति की मुहर लग गयी है. सवर्ण समाज के लोग खुशी जाहिर कर रहे हैं, क्योंकि लंबे समय के बाद सरकार ने माना कि जाति और मजहब देख कर गरीबी नहीं आती. समाज का हर तबका गरीब हो सकता है. इस बिल को लाकर भाजपा ने तो अपना चुनावी रास्ता भी तैयार कर लिया है.
वहीं चुनावी मौसम होने के कारण कोई भी दल खुल कर इस बिल का विरोध नहीं कर पाया और समर्थन में अपना मत दिया है. यह एक ऐतिहासिक लम्हा भी रहा, क्योंकि एक सरकार ने तो अपने 55 वर्षों के शासन में भी इस कानून को पास नहीं करा पाया, वहीं भाजपा ने इस बिल को सिर्फ पांच दिनों में कानून का रूप दे दिया.
धीरज पाठक, शास्त्रीनगर, चैनपुर
