न कोई अपराजेय, न अछूत

छत्तीसगढ़ ,राजस्थान और मध्यप्रदेश के चुनावी नतीजों में कुछ भी अप्रत्याशित नहीं है. पूर्व के उपचुनावों में क्लोज कांटेस्ट के माध्यम से जनता भाजपा को लगातार यह संकेत दे रही थी कि कांग्रेस उसे पसंद नहीं लेकिन अछूत भी नहीं है. भाजपा यदि महंगाई, भ्रष्टाचार और अपने कैडरों की लगातार उपेक्षा करती रहेगी, तो नहीं […]

छत्तीसगढ़ ,राजस्थान और मध्यप्रदेश के चुनावी नतीजों में कुछ भी अप्रत्याशित नहीं है. पूर्व के उपचुनावों में क्लोज कांटेस्ट के माध्यम से जनता भाजपा को लगातार यह संकेत दे रही थी कि कांग्रेस उसे पसंद नहीं लेकिन अछूत भी नहीं है.
भाजपा यदि महंगाई, भ्रष्टाचार और अपने कैडरों की लगातार उपेक्षा करती रहेगी, तो नहीं चाह कर भी जनता को भाजपा से इतर जाना पड़ेगा. एससी-एसटी एक्ट को लेकर भी एक वर्ग में जो नाराजगी थी, उसका भी असर चुनाव परिणामों में साफ दिखा.
उपरोक्त चुनाव परिणामों ने यह सिद्ध कर दिया है कि न तो भाजपा अपराजेय है, न कांग्रेस अछूत. अतः लोकसभा चुनाव में यदि बेहतर करना है, तो भाजपा को सबक लेने की जरूरत है. उसे कांग्रेस की नाकामियों के बजाय अपनी उपलब्धियों पर चुनाव में जाना होगा.
ऋषिकेश दुबे, पलामू

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