नाम सुधार का सिलसिला !

देश में नाम सुधारने या बदलने का सिलसिला पिछले कई वर्षों से विशेषकर भाजपा शासन में जारी है. बहुत पहले कलकत्ता, बंबई, मद्रास और त्रिवेंद्रम का नाम बदलकर क्रमशः कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और तिरुअंतपुरम किया गया था. अब फिर इलाहाबाद, मुगलसराय और फैजाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज, दीनदयाल उपाध्याय नगर और अयोध्या कर दिया गया […]

देश में नाम सुधारने या बदलने का सिलसिला पिछले कई वर्षों से विशेषकर भाजपा शासन में जारी है. बहुत पहले कलकत्ता, बंबई, मद्रास और त्रिवेंद्रम का नाम बदलकर क्रमशः कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और तिरुअंतपुरम किया गया था. अब फिर इलाहाबाद, मुगलसराय और फैजाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज, दीनदयाल उपाध्याय नगर और अयोध्या कर दिया गया है.
यह कोई बुरी बात नहीं, बशर्ते इससे कुछ लाभ हो और किसी को कोई परेशानी न हो. मगर सच है कि नाम बदलने से जनता को परेशानी होती ही है और इसमें धन भी खर्च होता है. माना कि ये नाम देश की दास्तां के प्रतीक थे, जो बोलने और सुनने में भी शायद सही नहीं थे, मगर नाम के सुधार के साथ तो खुद इनका भी सुधार, चंडीगढ़ की तर्ज पर, होना बहुत जरूरी है. दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा.
वेद मामूरपुर ,नरेला

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