आशुतोष चतुर्वेदी
प्रधान संपादक, प्रभात खबर
ashutosh.chaturvedi
@prabhatkhabar.in
आजकल सोशल मीडिया पर अनूप जलोटा ने सबको मात दे रखी है. कुछ समय पहले तक चुटकुलों के लिए राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल सोशल मीडिया पर छाये रहते थे, लेकिन आजकल अनूप जलोटा ने सबको पीछे छोड़ दिया है.
वह इन दिनों सोशल मीडिया के निशाने पर हैं. इसकी वजह है कि बिग बॉस में अनूप जलोटा और उनकी मित्र जसलीन मथारू का प्रवेश. बिग बॉस के मंच पर पहली बार अनूप जलोटा और उनकी छात्रा जसलीन मथारु ने अपने प्यार का इजहार किया. 65 साल के अनूप जलोटा ने कबूला कि वह अपने से 37 साल छोटी जसलीन के साथ रिश्ते में हैं. सलमान खान के सामने अनूप जलोटा और जसलीन ने रहस्योदघाटन किया कि वे बिग बॉस में आने से पहले तक अपने रिश्ते को पोशीदा रखा था और वे छुप-छुप कर मिला करते थे. सलमान खान भी अनूप जलोटा के प्रेम पर चुटकी लेते हुए दिखे. जसलीन ने बताया कि वे दोनों अब तक इस रिश्ते के बारे में बताने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन अब वे अपने प्यार को दुनिया के सामने लाने के लिए तैयार हैं.
अगर प्रेम करने वाले वयस्क हैं, तो उसमें उम्र की कोई भूमिका नहीं है. इसमें किसी को ताक-झांक का अधिकार भी नहीं है. मेरी भी मंशा इस बारे में कोई नैतिक ज्ञान देने की नहीं है. अनूप जलोटा जसलीन मथारू या किसी अन्य से रिश्ते रखने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन यह एक मिसाल भी है कि भोगवादी संस्कृति हमारे समाज में कितनी हावी हो गयी है.
बिग बॉस जैसे टीवी कार्यक्रम इंसानी रिश्तों को बाजार में ला खड़ा कर दे रहे हैं और इसका मोहरा अनूप जलोटा जैसे जाने-माने लोग भी बन रहे हैं. जाहिर है कि इसमें पैसे की महत्वपूर्ण भूमिका रही होगी. जसलीन की बात तो गले उतर सकती है, वह युवा है और उसे बॉलीवुड की दुनिया में स्थापित होने की चाहत होगी.
अनूप जलोटा तो स्थापित व्यक्ति हैं. उन्हें अपने प्रेम को एक टीवी शो में सार्वजनिक करने की क्या जरूरत थी? अगर आप आपस में प्रेम करते हैं, तो उसको बिग बॉस जैसे कार्यक्रम की टीआरपी बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करने देने की क्या जरूरत थी? आपको याद हो, तो टीवी चैनल टीआरपी के लिए शो पर शादियां तक करा चुके हैं, लेकिन बाजारवाद की खासियत है कि वह इंसान की तृष्णा को कभी खत्म नहीं होने देता. एक पवित्र रिश्ते को बाजार के हवाले कर देना, बाजार की दृष्टि से भले ही उचित हो, लेकिन नैतिक दृष्टि से कतई उचित नहीं है.
सोशल मीडिया पर अनूप जलोटा की काफी लानत मलानत की जा रही है. भद्रता की सभी सीमाएं पार कर दी जा रही हैं. मैं कुछ पेश की जा सकने वाली प्रतिक्रियाओं को ही यहां स्थान दे पा रहा हूं- ऐसी लागी लगन, जलोटा हो गये मगन. एक अन्य प्रतिक्रिया थी कि भजन गाने वाले के लिए ऊपर वाले के यहां देर हैं, मगर अंधेर नहीं है.
एक ने लिखा- गंगाजी के कछुए जब जलोटा का इंतजार कर रहे हैं, उस वक्त वह शादी रचा रहे हैं. इतनी तीखी प्रतिक्रियाओं की एक बड़ी वजह है अनूप जलोटा की पृष्ठभूमि. भारतीय समाज में सबके लिए एक खांचा फिट है. उससे बाहर निकलना बेहद कठिन है. अनूप जलोटा की छवि भजन गाने वाले संस्कारी गायक की है. वह भजन सम्राट कहे जाते हैं.
उन्हें पद्मश्री पुरस्कार मिल चुका है. उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है. उनकी यह छवि उनके आड़े आ रही है और लोग इसके कारण बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं. जलोटा इससे पहले तीन बार शादी कर चुके हैं. मौजूदा विवाद के पहले तक यह बात बहुत कम लोगों को मालूम होगी. उनकी पहली पत्नी गायिका सोनाली सेठ थीं. सोनाली सेठ से तलाक के बाद उन्होंने बीना भाटिया के साथ विवाह किया, लेकिन इनसे भी उनका तलाक हो गया.
इसके बाद उन्होंने तीसरी शादी पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल की भतीजी मेधा गुजराल से रचायी, लेकिन बाद में उनकी भी मौत हो गयी. इस शादी से उनका एक बेटा भी है. दूसरी ओर, जसलीन पेशे से गायक हैं और वह काफी समय से अनूप जलोटा से संगीत की शिक्षा ले रही हैं. जसलीन के मुताबिक संगीत सीखने के दौरान ही उन्हें अपने गुरु से प्यार हो गया. वह एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखती हैं.
उन्होंने परिवार से अनूप जलोटा के साथ अपने रिश्तों को छुपा कर रखा था. हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि यह टीवी शो के लिए रचा गया नाटक है. अगर यह बात सच है, तो और भी गंभीर है, लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है, जो अनूप जलोटा के पक्ष में जाता है. उन्होंने अपने प्रेम को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया. किसी ढ़ोंगी बाबा की तरह उस नवयुवती का शोषण तो नहीं करते रहे. वह भजन सम्राट हैं, पर आम जन बने रहे और उसमें जो अच्छाइयां या कमियां होती हैं, उसी के अनुसार उनका आचरण रहा है. भारत में प्रेम का मामला हमेशा नाजुक होता है.
यहां जाति, धर्म, सामाजिक हैसियत और यहां तक कि समान गोत्र होने पर भी प्रेमी-प्रेमिका की शामत आ जाती है. यहां तक कि उन्हें अपनी जान से भी हाथ गंवाना पड़ जाता है. फिर यह तो 65 साल के गुरु और 28 साल की शिष्या के रिश्ते का मामला है. इसके पहले बॉलीवुड के अन्य अनेक लोगों ने ऐसी शादियां की हैं, पर उस पर कभी इतना तूफान नहीं खड़ा हुआ है. पुराने दौर को याद करें तो सायरा बानो ने अपने से 22 वर्ष बड़े दिलीप कुमार से शादी की थी. कबीर बेदी ने अपने से 28 वर्ष छोटी परवीन दुसांज से शादी की है.
जब उन्होंने विवाह किया, उस समय उनकी उम्र 70 साल थी. जाने-माने सितार वादक पंडित रविशंकर ने अपने से 34 वर्ष कम उम्र की सुकन्या राजन से विवाह किया, पर कोई हंगामा नहीं हुआ. प्रियंका चोपड़ा और निक जोनास की उम्र को लेकर भी सोशल मीडिया में हल्की-फुल्की प्रतिक्रिया हुई थी. प्रियंका निक जोनास से 10 साल बड़ी हैं.
आप प्रभात खबर उठा लें और शादी के विज्ञापनों पर नजर डालें, तो आप पायेंगे कि 28-30 वर्ष के हर नवयुवक को 20-22 साल की गोरी नवयुवती चाहिए.
उम्र का यह अंकगणित गलत हो या सही, समाज में स्थापित है, लेकिन जीवन के किसी अन्य पड़ाव पर किसी ने शादी का मन बनाया, तो ये नियम कहां चलने वाले हैं, लेकिन सबसे दुखद है कि इस हंगामे की काली छाया अनूप जलोटा के संगीत के क्षेत्र में योगदान पर पड़ रही है. दिलचस्प यह है कि वह भजनों के अलावा गजल में भी उतने ही सिद्धहस्त हैं. संगीत के जानकारों का मानना है कि अनूप जलोटा को भजनों को मंदिरों से मंच तक ले जाने का श्रेय जाता है.
उनके भजन-ऐसी लागी लगन…, मैया मोरी मैं नहीं ही माखन खायो… और जग में सुंदर हैं दो नाम… जैसे भजनों की पहुंच घर-घर तक है. उन्होंने भजनों की लोकप्रियता को नये मुकाम पर पहुंचाने में भारी योगदान दिया है और इस विधा को पुन: स्थापित किया है.
