लोकतंत्र में हिंसा का स्थान नहीं

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और लोकतंत्र में असहमति, विरोध व प्रदर्शन होते रहते हैं. इससे लोकतंत्र भी मजबूत होता है.जनता को जब-जब ऐसा लगता है कि उनके अधिकारों का हनन हो रहा है या उनका शोषण हो रहा है या फिर किसी भी प्रकार से उनके साथ इंसाफ नहीं हो रहा, […]

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और लोकतंत्र में असहमति, विरोध व प्रदर्शन होते रहते हैं. इससे लोकतंत्र भी मजबूत होता है.जनता को जब-जब ऐसा लगता है कि उनके अधिकारों का हनन हो रहा है या उनका शोषण हो रहा है या फिर किसी भी प्रकार से उनके साथ इंसाफ नहीं हो रहा, तब-तब लोग अपना विरोध प्रकट करते हैं और सड़क से सदन तक अपनी आवाज बुलंद करते हैं. ऐसा होना भी चाहिए, ताकि उनके साथ किसी भी प्रकार से अन्याय न हो, परंतु लोकतंत्र में हिंसा का स्थान नहीं है.

लोकतंत्र में संवाद है. पिछले दिनों सवर्णों के भारत बंद के दौरान सांसद पप्पू यादव पर हमला कर उन्हें पीटना बेहद निंदनीय है. लोकतंत्र में ऐसे आचरण का कोई स्थान नहीं है.

शादाब अफजल, चंद्रपुरा

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >