VIDEO: मुंब्रा स्टेशन पर ट्रेन से गिरी महिला, पिछले साल 5 मौतों के बाद भी नहीं बदले हालात?

मुंबई के मुंब्रा स्टेशन पर एक महिला चलती ट्रेन से गिर गई, लेकिन ट्रेन रुकी होने के कारण उसकी जान बच गई. इस घटना ने एक बार फिर लोकल ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.

मुंबई से सटे मुंब्रा स्टेशन पर एक महिला ट्रेन से गिर गई. गनीमत रही कि जिस समय वह गिरी, ट्रेन सिग्नल पर रुकी हुई थी. इस कारण उसकी जान बच गई. घटना ने एक बार फिर मुंबई की लोकल ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

पिछले साल भी इसी इलाके में हुई थीं मौतें

मुंब्रा स्टेशन के पास ट्रेन से गिरने की घटनाएं नई नहीं हैं. पिछले साल इसी इलाके में ट्रेन से गिरकर पांच लोगों की मौत हो गई थी. इन हादसों के बाद लोगों ने रेलवे की व्यवस्था पर सवाल उठाए थे.

हादसों के बाद AC लोकल और बंद दरवाजों का किया गया था जिक्र

पिछले हादसे के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से AC लोकल ट्रेनों और बंद दरवाजों वाली व्यवस्था को लेकर जल्द कदम उठाने की बात कही गई थी. इसका मकसद यात्रियों को लोकल ट्रेन से गिरने जैसी घटनाओं से बचाना बताया गया था.

हादसों के बाद ही क्यों होती है रेलवे की नींद?

मुंब्रा रेलवे स्टेशन की ताजा घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर यात्रियों की सुरक्षा के लिए स्थायी इंतजाम कब होंगे? आलोचकों का आरोप है कि बड़े हादसों के बाद घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन कुछ समय बीतने के बाद वही समस्याएं फिर सामने आ जाती हैं.

यात्री जोखिम उठाकर सफर करने को मजबूर

मुंबई की लोकल ट्रेन लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है. नौकरी और काम के लिए हर दिन बड़ी संख्या में लोग लोकल ट्रेनों में सफर करते हैं. भीड़ और सीमित संसाधनों के बीच कई यात्री जोखिम उठाकर सफर करने को मजबूर होते हैं.

एक हादसा फिर पूछ रहा सवाल

मुंब्रा स्टेशन पर महिला के ट्रेन से गिरने की यह घटना भले ही जानलेवा साबित नहीं हुई, लेकिन इसने यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस फिर तेज कर दी है. सवाल यही है कि हादसों और मौतों के बाद होने वाली घोषणाओं को जमीन पर कब उतारा जाएगा, ताकि मुंबईकरों को रोज अपनी जान जोखिम में डालकर सफर न करना पड़े.

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By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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