Water Conservation: जल सुरक्षा को लेकर शुरू हुआ राष्ट्रीय पहल

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने महात्मा गांधी नरेगा के तहत जल संरक्षण को एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है, जिसके तहत देश के जल-संकटग्रस्त ग्रामीण ब्लॉक में जल-संबंधी कार्यों को प्राथमिकता देने के लिए मनरेगा अधिनियम, 2005 की अनुसूची में संशोधन किया गया है. इस ऐतिहासिक संशोधन के तहत ग्रामीण ब्लॉकों में जल संरक्षण और संचयन के काम पर न्यूनतम व्यय को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया है. इसका मकसद देश में पानी के संकट को दूर करना है.

Water Conservation: गर्मी के मौसम में देश के कई इलाके गंभीर जल संकट का सामना करते हैं. देश में भूजल स्तर लगातार कम हो रहा है. जल संकट से निपटने के लिए जल संचय करना जरूरी है. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने महात्मा गांधी नरेगा के तहत जल संरक्षण को एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है, जिसके तहत देश के जल-संकटग्रस्त ग्रामीण ब्लॉक में, जल-संबंधी कार्यों को प्राथमिकता देने के लिए मनरेगा अधिनियम, 2005 की अनुसूची में संशोधन किया गया है. इस ऐतिहासिक संशोधन के तहत ग्रामीण ब्लॉकों में जल संरक्षण और संचयन के काम पर न्यूनतम व्यय को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया गया है.


जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए गुरुवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने संयुक्त रूप से जल सुरक्षा पर राष्ट्रीय पहल’ का शुभारंभ किया. इस दौरान केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव शैलेश सिंह और दोनों ही मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. साथ ही वर्चुअली देश के ग्रामीण ब्लॉकों के प्रतिनिधियों और जिलाधिकारी शामिल हुए. 

जल संरक्षण पर जोर

पहल की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भूजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है. पानी दुनिया की एक बड़ी समस्या है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समस्या के समाधान के लिए कई साल से लगे हुए है. प्रधानमंत्री ने ‘कैच द रेन’, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, जल संरक्षण के लिए अमृत सरोवर के निर्माण सहित विभिन्न अभियानों के जरिये जल संरक्षण पर जोर दिया है. ‘अति जल संकट वाले ब्लॉक में 65 फीसदी राशि मनरेगा के जल संरक्षण संबंधी काम पर खर्च होगी. वही सेमी-क्रिटिकल ब्लॉक में 40 फीसदी और जहां जल संकट नहीं है वहां कम से कम 30 फीसदी राशि जल संकट से जुड़े काम पर खर्च होगी.


जल संकट का समाधान है जरूरी


चौहान ने कहा कि अब पूरे देश में मनरेगा की राशि जल संरक्षण के काम पर प्राथमिकता के साथ खर्च होगी और इससे भू जल स्तर बढ़ाने एवं जल संरक्षण अभियान को गति मिलेगी. यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संसाधन उन क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए जहां उनकी सबसे अधिक जरूरत है. वहीं केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल संचयन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते रहे हैं. उनके दूरदर्शी नेतृत्व में काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है. प्रधानमंत्री के निर्देश पर ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मनरेगा के 88,000 करोड़ के बजट में से रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के लिए 65 फीसदी राशि डार्क जोन जिलों, 40 फीसदी राशि सेमी-क्रिटिकल जिलों और 30 फीसदी राशि अन्य जिलों के लिए निर्धारित किया. यह निर्णय जल सुरक्षा और ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा. 

जल संरक्षण में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी 

गौरतलब है कि पिछले 11 साल में ग्रामीण विकास और जल संरक्षण में मनरेगा की महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. मनरेगा के तहत पिछले 11 साल में 8.4 लाख करोड़ खर्च किया गया है और इससे 3000 करोड़ से अधिक मानव-दिवस रोजगार सृजन हुआ. यह दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक कल्याण योजना बन गयी है. खास बात यह है कि योजना में महिलाओं की भागीदारी वर्ष 2014 में 48 फीसदी थी, जो वर्ष 2025 बढ़कर 58 फीसदी हो गयी है. इस योजना के तहत कृषि तालाबों, चेकडैम और सामुदायिक तालाबों जैसे 1.25 करोड़ से अधिक जल संरक्षण परिसंपत्तियां बनाने का काम किया गया है. इसके कारण जल संकटग्रस्त ग्रामीण ब्लॉक की संख्या में कमी आयी है. इसके अलावा मिशन अमृत सरोवर के तहत पहले चरण में 68,000 से अधिक जलाशयों का निर्माण या पुनरुद्धार किया गया है.

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Published by: Anjani kumar singh

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