Viral Video : जंगल के राजा शेर के सामने तनकर खड़ा हुआ दुनिया का सबसे खतरनाक सांप ब्लैक माम्बा और फिर...

Viral Video : ब्लैक माम्बा दुनिया का सबसे खतरनाक सांप है. इसका जहर इतना खतरनाक होता है कि कुछ ही घंटों में शिकार की मौत हो जाती है. यह सांप जब जंगल में शेर के सामने आ जाता है, तो क्या होता होगा? यह जानना हो तो यह वीडियो देखें.

Viral Video : जंगल में अगर जंगल के राजा शेर और दुनिया के सबसे खतरनाक सांप ब्लैक माम्बा (Black Mamba) के बीच भिड़ंत हो जाए तो क्या होगा? यह सवाल ही उत्सकुता पैदा करने वाला है. इस वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि जंगल में आमना-सामना होने के बाद क्या हुआ.

ब्लैक माम्बा और शेर दोनों को अपनी ताकत का गुरुर

Nature is Amazing के एक्स हैंडल पर यह वीडियो डाला गया है. इस वीडियो में यह साफ दिख रहा है कि एक शेर के सामने ब्लैक माम्बा तन कर खड़ा है. शायद उसे अपनी ताकत का गुरुर है और इसलिए वह जंगल के राजा के सामने चुनौती देने के अंदाज में खड़ा है. राजा तो राजा है, वह भी किसी से डरता तो नहीं है, लेकिन वह ब्लैक माम्बा पर बहुत ही सावधानी से हमला कर रहा है. यह दृश्य काफी रोचक तो है, लेकिन डराने वाला भी है. शेर पहले तो ब्लैक माम्बा को अच्छे से घूरता है और उसके बाद बहुत ही सावधानी से उसपर पंजा मारता है. शेर के पंजे में फंसकर ब्लैक माम्बा उससे दूर तो छिटक जाता है, लेकिन एक बार फिर भिड़ने के लिए तैयार दिखता है.

ब्लैक माम्बा को क्यों माना जाता है इतना खतरनाक सांप

ब्लैक माम्बा की गिनती दुनिया के सबसे खतरनाक और जहरीले सांपों में की जाती है. इसका वैज्ञानिक नाम डेंड्रोस्पिस पॉलिप्स (Dendroaspis polylepis) है. यह अफ्रीका के सवाना जंगलों में पाया जाने वाला सांप है. यह एलापिडे( Elapidae) परिवार का सांप है, जिसमें दुनिया के सबसे जहरीले सांपों को रखा जाता है. इसके शरीर का रंग हल्का ग्रे, ऑलिव या ब्राउन होता है, लेकिन इसका मुंह अंदर से काला होता है. जब यह हमला करता है, तो अपने मुंह को बड़ा कर लेता है और उसे चौड़ा खोलकर हमला करता है. इसे मुंह के डरावने रंग और आकार की वजह से ही इसे ब्लैक माम्बा कहा जाता है. इसकी लंबाई 14 फीट तक होती है.यह बहुत तेज रफ्तार से चलता है इसकी चाल 20 किलीमीटर प्रति घंटे तक होती है. इसका जहर बहुत ही खतरनाक होता है और यह न्यूरोटॉक्सिक होता है, जो तंत्रिका तंत्र पर सीधा हमला करता है. जहर का असर तुरंत शुरू हो जाता है और मांसपेशियों में लकवा (paralysis) सांस लेने में दिक्कत होने लगती है और अगर इलाज ना मिले तो कुछ ही घंटों में मौत भी हो जाती है.

क्या शेर पर ब्लैक माम्बा का जहर असर करता है

ब्लैक माम्बा के जहर का असर शेर पर भी होता है, क्योंकि शेर में भी तंत्रिका तंत्र उसी तरह काम करता है, जैसे इंसानों में. लेकिन अकसर यह दोनों ही जीव एक दूसरे से बचते हैं. चूंकि दोनों एक ही क्षेत्र में रहते हैं, इसलिए इनका आमना-सामना तो होता है, लेकिन एक दूसरे की क्षमता को पहचानते हुए ये एक दूसरे से बचते हैं.हालांकि ब्लैक माम्बा का जहर शेर के लिए खतरनाक है और अगर शेर के शरीर में इसका जहर अधिक मात्रा में चला जाए तो उसकी मौत भी हो सकती है.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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