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US Tariffs: कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर एक बयान में कहा, शुक्रवार को टैरिफ के बारे में आया अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमारे संज्ञान में है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस संबंध में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया है. अमेरिकी प्रशासन की तरफ से कुछ कदमों की घोषणा की गई है. हम इन सभी घटनाक्रमों का उनके प्रभावों का बारीकी से स्टडी कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप को रद्द करने का फैसला सुनाया
ट्रंप की तरफ से पिछले साल भारत समेत करीब 60 देशों के खिलाफ जारी शुल्क आदेशों को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रद्द घोषित कर दिया. इसके बाद ट्रंप ने 10 प्रतिशत वैश्विक सीमा शुल्क लगाने की घोषणा कर दी. ट्रंप के ताजा ऐलान के मुताबिक, अमेरिका 24 फरवरी से 150 दिनों की अवधि के लिए आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का अस्थायी एड-वेलोरम (मूल्य आधारित) आयात सरचार्ज लगाएगा.
अमेरिका ने भारत पर लगाया था 50 प्रतिशत टैरिफ
इससे पहले अमेरिका ने अगस्त में भारत पर 25 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाया था. बाद में रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगा दिया जिससे कुल शुल्क बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच गया. हालांकि, फरवरी महीने की शुरुआत में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर सहमति बनी, जिसके तहत अमेरिका शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ है. रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए लगा दंडात्मक 25 प्रतिशत शुल्क हटाया जा चुका है जबकि शेष 25 प्रतिशत शुल्क प्रभावी चल रहा था.
भारतीय वस्तुओं पर 10 प्रतिशत टैरिफ रह जाएगा
हालांकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रंप की नई घोषणा के बाद भारतीय वस्तुओं पर शुल्क 10 प्रतिशत रह जाएगा. यह 10 प्रतिशत अधिभार अमेरिका में सर्वाधिक तरजीही देशों (एमएफएन) पर लागू मौजूदा शुल्क या अन्य आयात शुल्क के अतिरिक्त होगा. ट्रंप ने कहा है कि भारत के साथ व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं हुआ है और यह प्रक्रिया जारी है.
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