Vikram-1 Rocket Launch : भारत के प्राइवेट रॉकेट विक्रम-1 का सफल लॉन्च स्पेस सेक्टर के लिए एक बड़ी कामयाबी है. श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से एक निजी कंपनी 'स्काईरूट एयरोस्पेस' द्वारा बनाए गए 'विक्रम-1' रॉकेट का पहला सफल ऑर्बिटल लॉन्च किया गया. इस बेहद खास और बड़े मिशन को 'आगमन' नाम दिया गया था. इस सफलता के साथ ही भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर में एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत हो गई है. जिसने दुनिया भर के वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है.
युवा टीम की 28 साल पुरानी परंपरा को चुनौती
इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि इसे बेहद कम उम्र के युवा इंजीनियरों की टीम ने तैयार किया है. स्काईरूट कंपनी की शुरुआत पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका नाम के दो दोस्तों ने मिलकर की थी. इस युवा टीम ने औसतन 28 साल की उम्र में इस जटिल तकनीक को विकसित कर यह साबित कर दिया कि भारतीय युवाओं में प्रतिभा और साहस की कोई कमी नहीं है. उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद फोन करके पूरी टीम को बधाई दी है.
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क्या है विक्रम-1 रॉकेट की खासियत?
विक्रम-1 भारत का पहला ऐसा रॉकेट है जिसे पूरी तरह से एक निजी कंपनी ने तैयार किया है. यह चार चरणों वाला एक बेहद आधुनिक रॉकेट है, जिसके पहले तीन चरण ठोस ईंधन और आखिरी चरण लिक्विड ईंधन से संचालित होते हैं. यह रॉकेट करीब 500 किलोग्राम तक के छोटे उपग्रहों (सैटेलाइट्स) को बेहद सटीक तरीके से धरती की निचली कक्षा (लो-अर्थ ऑर्बिट) में स्थापित करने की क्षमता रखता है. इस तकनीक के आने से छोटे सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने का खर्च काफी कम हो जाएगा.
ग्लोबल मार्केट में बढ़ेगा भारत का दबदबा
इस सफल लॉन्चिंग के साथ ही भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां प्राइवेट कंपनियां भी अंतरिक्ष में रॉकेट भेज सकती हैं. स्काईरूट एयरोस्पेस का अगला लक्ष्य इस रॉकेट को पूरी तरह से दोबारा इस्तेमाल करने योग्य (रीयूजेबल) बनाना है, जिससे लॉन्चिंग की लागत और भी कम हो जाएगी. इस कदम से न केवल देश में नए रोजगार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वैश्विक कमर्शियल स्पेस मार्केट में भी भारत की हिस्सेदारी काफी मजबूत होगी.
