Twisha Sharma Death Case: भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. मृतका के परिजन जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं और दूसरे पोर्टमॉर्टम की मांग पर अड़े हैं. वहीं पुलिस ने साफ किया है कि दूसरे पोस्टमार्टम पर उसे कोई आपत्ति नहीं है. इस बीच मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी किया गया है. ट्विशा शर्मा के पिता नव निधि शर्मा ने मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले में जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. बुधवार को उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही पीड़ित परिवार पर शव को जल्द अपने कब्जे में लेने का दबाव बनाया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया, जिनमें लिगेचर फाइंडिंग्स (गले पर पड़े निशान) से जुड़ी जानकारी को छिपाया गया.
ट्विशा शर्मा के पिता का दावा- सबूतों के साथ की गई छेड़छाड़
ट्विशा शर्मा के पिता नव निधि शर्मा ने आरोप लगाया है कि शव को जानबूझकर देर से सौंपा गया ताकि वह सड़ जाए और आगे की फोरेंसिक जांच प्रभावित हो सके. उन्होंने कहा कि शव की लंबाई तक कथित रूप से गलत दर्ज की गई है और कई अहम तथ्य छिपाए गए हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह करते हुए कहा कि मामले पर तत्काल संज्ञान लें और एक स्वतंत्र जांच के लिए आवश्यक व्यवस्था करें.
भोपाल पुलिस ने कहा- दूसरे पोस्टमार्टम पर कोई आपत्ति नहीं
भोपाल के पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने बुधवार को कहा कि पुलिस को ट्विशा शर्मा के दूसरे पोस्टमार्टम पर कोई आपत्ति नहीं है. उन्होंने बताया कि मृतका के परिजन उनसे मिले थे और दोबारा पोस्टमार्टम की मांग वाला आवेदन सौंपा था. पुलिस आयुक्त के अनुसार- यह आवेदन केस डायरी के साथ अदालत को भेज दिया गया है, लेकिन इसकी अनुमति देना कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है. कुमार ने कहा- यदि दूसरा पोस्टमार्टम होता है तो पुलिस को कोई एतराज नहीं है. हमने अपनी जांच की है और साक्ष्यों की पड़ताल की है.
भोपाल अदालत ने मांगी केस डायरी
पुलिस आयुक्त का यह बयान ऐसे समय में आया है जब न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) की अदालत मृतका के परिजनों की उस अर्जी पर केस डायरी की जांच करने वाली है, जिसमें नए सिरे से पोस्टमार्टम कराने की मांग की गई है. परिजनों ने अपनी अर्जी में जांच में लापरवाही का आरोप लगाया है और कहा है कि ट्विशा के मृत पाए जाने के तीन दिन बाद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई. अर्जी में यह भी कहा गया है कि संक्षिप्त पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जिक्र है कि जांचकर्ताओं ने पोस्टमार्टम के दौरान कथित फंदे के लिए इस्तेमाल वस्तु उपलब्ध नहीं कराई.
ट्विशा के परिजन पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर उठा रहे सवाल
मृतका के परिजनों की ओर से पेश अधिवक्ता अंकुर पांडे ने पहले कहा था कि उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली में दूसरा पोस्टमार्टम कराने की मांग की है. अर्जी में कहा गया है कि पोस्टमार्टम के दौरान कथित फंदे के लिए इस्तेमाल वस्तु जांचकर्ताओं द्वारा उपलब्ध नहीं कराई गई. परिजनों का यह भी दावा है कि ट्विशा के शरीर पर मौजूद चोटों का जिक्र प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नहीं किया गया.
एम्स दिल्ली में पोस्टमार्टम की मांग क्यों कर रहे परिजन?
पीड़ित परिवार ने एम्स दिल्ली में दूसरे पोस्टमार्टम की मांग करते हुए कहा है कि भोपाल में निष्पक्ष जांच को लेकर उन्हें संदेह है. अधिवक्ता अंकुर पांडे ने दावा किया कि ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह की बहन भोपाल में सर्जन हैं और यदि दोबारा पोस्टमार्टम शहर में हुआ तो जांच प्रभावित हो सकती है. उन्होंने दावा किया कि पहला पोस्टमार्टम किए जाने के दौरान उक्त सर्जन को एम्स भोपाल के आसपास देखा गया था.
पति और सास पर दर्ज है मामला
ट्विशा शर्मा 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं. इसके बाद पुलिस ने पति समर्थ सिंह और सास गिरीबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु और प्रताड़ना का मामला दर्ज किया है. पुलिस आयुक्त ने बताया कि समर्थ सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें गठित की गई हैं. समर्थ पेशे से अधिवक्ता हैं और उनका विवाह दिसंबर 2025 में ट्विशा से हुआ था.
ट्विशा के परिजनों का सवाल- स्वतंत्र चिकित्सकीय परीक्षण से क्यों डर रहे आरोपी?
ट्विशा के परिजनों ने सोमवार को जारी बयान में कहा था कि यदि आरोपी वास्तव में निर्दोष हैं तो एम्स दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में स्वतंत्र चिकित्सकीय परीक्षण से डर क्यों है. परिवार ने कहा कि उनकी मांग केवल सच्चाई, वैज्ञानिक स्पष्टता और निष्पक्ष जांच की है. उनका कहना है कि स्वतंत्र मेडिकल जांच से न केवल संदेह दूर होंगे बल्कि न्याय प्रणाली में लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा.
SIT कर रही है मामले की जांच
ट्विशा मौत मामले में दहेज प्रताड़ना, मारपीट और सबूत मिटाने के आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है. पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और मामले में जरूरी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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