ट्विशा शर्मा मौत मामले में सीबीआई ने की ससुराल पक्ष और माता-पिता से बातचीत, पति और जज सास को बनाया आरोपी

Twisha Sharma Death Case : ट्विशा शर्मा के परिजनों की मांग पर उसकी मौत की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है. सीबीआई ने उसके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया है. ट्विशा के परिजनों का आरोप है कि उसके ससुराल वाले उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे. उनकी प्रताड़ना ने ट्विशा को आत्महत्या के लिए प्रेरित किया.

Twisha Sharma Death Case : ट्विशा शर्मा के अंतिम संस्कार के बाद सीबीआई की एक टीम उसकी मौत की जांच करने के लिए मंगलवार को भोपाल स्थित उसके ससुराल पहुंची. यह जानकारी पीटीआई न्यूज एजेंसी ने एक पुलिस अधिकारी के हवाले से दी. अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि सीबीआई की टीम कुछ महिला कर्मियों के साथ कटारा हिल्स में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के घर पहुंची. इस मौके पर कई मीडियाकर्मी भी वहां मौजूद थे, लेकिन उन्हें घर के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी गई.

ट्विशा के परिजनों से भी की मुलाकात

ट्विशा के ससुराल वालों से मुलाकात के बाद सीबीआई की टीम भोपाल के पुराने शहर के शाहजहानाबाद क्षेत्र में आर्मी कैंटोनमेंट कुरुक्षेत्र मैस पहुंची, जहां ट्विशा के परिजन ठहरे हुए हैं.सीबीआई ने सोमवार को ट्विशा शर्मा की मौत की जांच अपने हाथ में ली थी. ट्विशा का शव 12 मई को भोपाल स्थित उसके ससुराल में फंदे से लटका मिला था. 24 मई को उसका अंतिम संस्कार दोबार पोस्टमार्टम के बाद किया गया. सीबीआई ने ट्विशा के वकील पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है.

सीबीआई ने शुरू की जांच

ट्विशा की संदिग्ध मौत की जांच अपने हाथों में लेने के बाद सीबीआई ने विशेष अपराध इकाई की एक टीम भोपाल भेजी है, जो मामले से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य जुटा रही है. सीबीआई ने राज्य पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी को प्रक्रिया के तहत अपने मामले के रूप में पुनः दर्ज किया है, जिसमें समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया गया है. सीबीआई ने राज्य पुलिस से जांच अपने हाथ में लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 80(2) (दहेज मृत्यु के लिए दंड), 85 (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा महिला के साथ क्रूरता) और 3(5) (साझा इरादा) के अलावा दहेज प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है.भोपाल पुलिस ने ट्विशा की मौत के दो दिन बाद प्राथमिकी दर्ज की थी.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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