26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली में हुई हिंसा को लेकर राजनीति तेजी हो गयी है. पुलिस ने हिंसा के लिए जहां किसान नेताओं को जिम्मेदार ठहरा रही है, वहीं विपक्ष इसके पीछे केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर बड़ा हमला करते हुए कहा, सरकार ने सुनियोजित तरीके से हिंसा करायी है.
किसानों को तीन रूट दिये गये थे रैली निकालने के लिए. सिंघू बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजिपुर बॉर्डर. सिंघू और टिकरी बॉर्डर में कोई विवाद नहीं हुआ, लेकिन गाजिपुर बॉर्डर में हिंसा की शुरुआत पुलिस की ओर से हुई. पुलिस ने उस रूट को बंद कर दिया था. जिसपर किसानवालों ने रूट खोलने की मांग की, जिसपर पुलिसवालों ने लाठी जार्च की और आंसू गैस के गोले दागे. पुलिस कार्रवाई के बाद वहां स्थिति काफी बिगड़ गयी. 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली में हुई हिंसा से जुड़ी हर Latest News in Hindi से अपडेट रहने के लिए बने रहें हमारे साथ.
दिग्विजय सिंह ने कहा, किसानों ने 15 लोगों को पकड़कर दिल्ली पुलिस को दिया है. उनके पास सरकारी मुलाजिम होने का पहचान पत्र मिला है. यह आंदोलन को गलत रास्ते पर दिखाने का षड्यंत्र था. लाल किले पर खालसा पंथ का झंडा नहीं था, पहले तिरंगा झंडा था उसके नीचे किसान यूनियन और खालसा का झंडा था.
इधर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से फिर आग्रह किया कि तीनों ‘कृषि विरोधी कानूनों’ को वापस लिया जाए. उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के एक कथन का हवाला देते हुए ट्वीट किया, विनम्र तरीके से आप दुनिया हिला सकते हैं-महात्मा गांधी. एक बार फिर मोदी सरकार से अपील है कि तुरंत कृषि-विरोधी कानून वापस लिए जाएं.
गौरतलब है कि किसान समूहों की ट्रैक्टर परेड के दौरान कई स्थानों पर पुलिस के साथ झड़प हुई. इसके बाद पुलिस ने किसान समूहों पर आंसू गैस के गोले छोड़े तथा लाठीचार्ज किया. दिल्ली की सीमा पर कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने अवरोधक तोड़ दिए. ट्रैक्टर परेड के लिए निर्धारित मार्ग से हटकर प्रदर्शनकारी किसानों का एक समूह मंगलवार को लालकिले में घुस गया और राष्ट्रीय राजधानी स्थित इस ऐतिहासिक स्मारक के कुछ गुंबदों पर अपने झंडे लगा दिए थे.
Posted By – Arbind kumar mishra
