राहुल गांधी का पीएम मोदी पर हमला-मोदी जी दिखावा छोड़िए और छात्रों की सुनिए, वरना…

Telegram Ban : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी से कहा कि दिखावा छोड़िए और छात्रों की आवाज सुनिए, वरना भारत के युवा अपना हक लेना जानते हैं.

Telegram Ban : नीट पेपर लीक को लेकर मैसेजिंग एप टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने के सरकार के कदम पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हमला बोला है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट लिखा कि पेपर लीक होने से रोकने के लिए चोर को पकड़ने के बजाय सरकार पीड़ित के घर पर ताला लगा रही है.

पीएम मोदी दिखावा छोड़िए

राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिखावा छोड़िए और पेपर लीक माफिया पर वार कीजिए. उन्होंने लिखा कि लाखों छात्र सालों से टेलीग्राम पर पढ़ते हैं, नोट्स, टेस्ट सीरीज, डिस्कशन, हर तरह से तैयारी करते हैं. ऐसे में उनसे उनकी सुविधा छीन लेना पेपर लीक का समाधान कैसे हुआ? टेलीग्राम पर बैन के बारे में उन्होंने कहा कि यह फूलप्रूफ भी नहीं है, यह देश का हर छात्र जानता है और पेपर लीक माफिया भी. ऐसे में पीएम मोदी अगला प्रतिबंध किसपर लगाएंगे? व्हाट्सएप पर?

देश का युवा अपना हक लेना जानता है

राहुल गांधी ने एक्स पर कटाक्ष किया है कि परीक्षा के दिन छात्रों की तलाशी होगी. जेबें कैंची से काटी जाएंगी. प्रश्नपत्र वायुसेना के विमानों से भेजे जाएंगे. दिखावे की कोई कमी नहीं होगी, लेकिन बीमारी की जड़ पर एक वार भी नहीं, क्योंकि पेपर लीक माफिया इसी सरकार की देख-रेख में फल-फूल रहे हैं और युवाओं को खून के आंसू रुला रहे हैं. राहुल गांधी ने कहा कि मोदी जी, दिखावा छोड़िए. माफिया पर वार कीजिए, छात्र पर नहीं. छात्रों की गूंज सुन लीजिए, वरना देश का युवा अपना हक लेना जानता है.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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