Tamil Nadu: दीपक ने इसकी शुरुआत तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण वाले दिन की थी. जब बाकी लोग जश्न मना रहे थे, तब दीपक ने एक साधारण सी वेबसाइट लॉन्च की. उनका मकसद उस आम शिकायत की हकीकत जानना था. TASMAC (सरकारी शराब दुकानों) पर हर बोतल पर वसूले जाने वाले अतिरिक्त 10 रुपये.
दीपक के प्रयास को मिली बड़ी सफलता, 300 शिकायतें आईं
सरकारी शराब दुकानों पर हर बोतल पर वसूले जाने वाले अतिरिक्त 10 रुपये का मुद्दा बड़ा हो चुका था. इसकी चर्चा हर जगह हो रही थी. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार दीपक ने बताया- इस मुद्दे को लेकर आम लोगों में भारी गुस्सा था. लेकिन मैं जानना चाहता था कि यह गुस्सा वास्तव में कितना व्यापक था. आगे जो हुआ उसने दीपक को चौंका दिया. कुछ ही दिनों में, लगभग 300 शिकायतें आईं. कुछ शिकायतों में दुकानों के नाम बताए गए थे, जबकि अन्य में तस्वीरें संलग्न थीं. तीसरे दिन एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने दीपक को फोन किया. उन्होंने इस विचार की सराहना की. TASMAC के अधिकारियों को भी इसके बारे में पता चल गया.
दीपक ने एक और वेबसाइट शुरू की मक्कल साची’ (Makkal Saatchi)
शुरुआती वेबसाइट को मिली भारी प्रतिक्रिया से हैरान होकर दीपक ने इसका दायरा बढ़ाया. केवल शराब दुकानों के भ्रष्टाचार तक सीमित न रहकर उन्होंने 27 मई को मक्कल साची (People’s Witness) नाम से एक नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया. अब तक इस प्लेटफॉर्म पर करीब 400 शिकायतें आ चुकी हैं. इनमें से अधिकांश गुमनाम हैं. लगभग 10 प्रतिशत शिकायतकर्ताओं ने स्वेच्छा से संपर्क विवरण दिए हैं. दीपक का कहना है कि कई शिकायतें कथित रकम के कारण नहीं, बल्कि उनमें वर्णित बेबसी के कारण चौंकाने वाली हैं। उन्होंने कहा, “कई शिकायतें अपने वर्णन में एकदम स्पष्ट हैं। कुछ तो दिल दहला देने वाली हैं। आप उन्हें भूल नहीं सकते। कुछ को पढ़ना भी कष्टदायक है। उन्हें पढ़कर मन भारी हो जाता है।”
जब डिजिटल आवाज का हुआ तगड़ा असर
दीपक ने भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए जिस मुहिम की शुरुआत की उसका तगड़ा असर देखने को मिला. कई विभाग में भ्रष्टाचार के मामले सामने आए.
चेन्नई पुलिस का मामला: एक पुलिस स्टेशन द्वारा निजी विवाद सुलझाने के लिए 50,000 रुपये की रिश्वत मांगी गई. दीपक ने जब इस शिकायत को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बड़े अधिकारियों को टैग किया, तो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तुरंत संज्ञान लिया और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई.
नमक्कल का सर्वेयर मामला: जमीन नापने वाले सर्वेक्षकों द्वारा नए उपकरणों की लागत वसूलने के नाम पर आवेदकों से 10,000 की मांग की जा रही थी. इस खुलासे के बाद अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया.
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