Watch Video: तहव्वुर राणा के लिए छोटू चाय वाले ने कर दी ऐसी मांग, मुंबई हमले के दिन किया था ऐसा काम

Tahawwur Rana: 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा को भारत लाया जा रहा है. इस बीच छोटू चाय वाले ने आरोपी के लिए कुछ ऐसी मांग कर दी है, जिसे जानने के बाद आप भी उसकी तारीफ किए बिना नहीं रहेंगे. आतंकी हमले के दौरान बचकर भागने में कई लोगों की मदद करने वाले छोटू चाय विक्रेता ने कहा है कि आरोपी तहव्वुर राणा को बिरयानी या अलग कोठरी जैसी कोई विशेष सुविधा नहीं दी जानी चाहिए और उसे फांसी पर लटका देना चाहिए.

Tahawwur Rana: ‘छोटू चाय वाला’ के नाम से मशहूर मोहम्मद तौफीक ने कहा, आतंकवादियों से निपटने के लिए देश में सख्त कानून बनाने की भी मांग की. तौफीक ने कहा, “तहव्वुर राणा को अलग कोठरी या बिरयानी और अन्य सुविधाएं देने की कोई जरूरत नहीं है, जैसी (जिंदा पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकवादी) अजमल कसाब को दी गई थीं.”

राणा को 15 दिन में दे देना चाहिए फांसी

चाय विक्रेता ने कहा, “आतंकवादियों के लिए भारत में भी सख्त कानून होना चाहिए. राणा का भारत लाया जाना हमारे लिए अच्छी खबर है, लेकिन उसे 15 दिन या दो-तीन महीने में सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी जानी चाहिए.”

मुंबई हमने में तौफीक ने कैसे लोगों की बचाई थी जान

तौफीक की दक्षिण मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) पर चाय की दुकान थी, जो नवंबर 2008 में आतंकवादियों के हमले की चपेट में आ गई थी. उन्होंने बताया कि हमले के दौरान उन्होंने अपनी आंखों के सामने लोगों को मरते हुए देखा था. तौफीक के अनुसार, इसके बाद उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों को सचेत किया, उन्हें हमले से बचने के लिए स्टेशन पर सुरक्षित दिशा की ओर जाने का निर्देश दिया तथा कई घायलों को अस्पताल पहुंचाया.

कसाब के मटन बिरयानी मांगने की क्या है सच्चाई?

मुंबई आतंकी हमले के मामले में सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने 2015 में कहा था कि कसाब द्वारा जेल में मटन बिरयानी की मांग करने की बात महज एक मिथक है और आतंकवादी के पक्ष में पैदा की जा रही भावनात्मक लहर को रोकने के लिए ऐसा कहा गया था. निकम ने कहा था, “कसाब ने कभी बिरयानी की मांग नहीं की और सरकार ने उसे कभी बिरयानी नहीं परोसी. मैंने यह कहानी सिर्फ उस भावनात्मक माहौल को खत्म करने के लिए गढ़ी थी जो मामले की सुनवाई के दौरान कसाब के पक्ष में बन रहा था.”

10 पाकिस्तानियों ने मुंबई हमले को दिया था अंजाम, 166 की हुई थी मौत

छह नवंबर, 2008 को 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों के एक समूह ने अरब सागर में समुद्री मार्ग का उपयोग करके भारत की वित्तीय राजधानी में घुसने के बाद सीएसएमटी, दो लक्जरी होटलों और एक यहूदी केंद्र पर हमला किया था. हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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