अरविंद केजरीवाल की जमानत अवधि बढ़ाने की याचिका पर तुरंत सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की उस याचिका पर अविलंब सुनवाई से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपनी जमानत अवधि बढ़ाने की मांग की थी.

Arvind Kejriwal : अरविंद केजरीवाल की जमानत की अवधि बढ़ाने से संबंधित याचिका पर अविलंब सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. अरविंद केजरीवाल ने स्वास्थ्य आधार पर जमानत की अवधि को सात दिन बढ़ाने का आग्रह करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किया था. ज्ञात हो कि अरविंद केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने स्वास्थ्य आधार पर उनकी अंतरिम जमानत को 7 दिनों तक बढ़ाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था, जिसे कोर्ट ने रिजेक्ट कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक सिंघवी से पूछा कि पिछले हफ्ते जब मेन बेंच के जस्टिस दीपांकर दत्ता सुनवाई कर रहे थे तब केजरीवाल की याचिका का उल्लेख क्यों नहीं किया गया? कोर्ट ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने का अनुरोध करने वाली मुख्यमंत्री केजरीवाल की याचिका को सूचीबद्ध करने पर उचित निर्णय लेंगे क्योंकि इस केस का फैसला अभी सुरक्षित रखा गया है.

अरविंद केजरीवाल को 2 जून को करना है सरेंडर

सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए एक जून तक के लिए अंतरिम जमानत दी है. दो जून को उन्हें सरेंडर करना होगा और तिहाड़ जेल जाना होगा. अरविंद केजरीवाल ने ईडी द्वारा अपनी गिरफ्तारी को गलत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किया है, जिसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी थी. कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा था कि अरविंद केजरीवाल कोई आदतन अपराधी नहीं हैं, लोकसभा चुनाव के दौरान उन्हें प्रचार का अधिकार मिलना चाहिए, क्योंकि चुनाव पांच साल में होने वाला अवसर है और हर पार्टी को इसमें अपने पक्ष में प्रचार करने का अधिकार होना चाहिए.

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अबतक नहीं हुई कोई बरामदगी

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव प्रचार के दौरान कई बार यह कहा है कि बीजेपी सरकार ने उनपर 100 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया है, लेकिन अबतक कहीं से भी कोई बरामदगी नहीं हुई है. अगर हमने चोरी की है, तो उन रुपयों का कुछ तो किया होगा, लेकिन कुछ भी बरामद नहीं हुआ है. शराब घोटाला पूरी तरह फर्जी है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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