जाति जनगणना रोकने की मांग वाली याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने ‘बदतमीजी भरी भाषा’ पर लगाई फटकार

Caste Census : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (10 अप्रैल) को उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया जिसमें जाति जनगणना रोकने की मांग की गई थी. साथ ही कोर्ट ने PIL में इस्तेमाल की गई भाषा पर भी सख्त नाराजगी जताई और कहा कि ऐसी भाषा ठीक नहीं है.

Caste Census : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार से जाति जनगणना रोकने, संसाधनों के बंटवारे को आबादी से जोड़ने और एक बच्चे वाले परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन देने जैसी नीतियां बनाने की मांग की गई थी. कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह के निर्देश देना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता.

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने याचिका पर सुनवाई से साफ इनकार कर दिया. याचिकाकर्ता खुद कोर्ट में पेश हुआ था, लेकिन कोर्ट ने उसकी मांग को स्वीकार नहीं किया.

इस तरह की भाषा बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा पर कड़ी नाराजगी जताई. कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह की भाषा बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने याचिकाकर्ता से सीधे सवाल किया. उन्होंने कहा कि इस याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा आप लोग कहां से सीखते हैं? ये बदतमीजी वाली भाषा कहां से लाते हैं? आप लोग इस तरह की याचिकाएं कैसे लिख देते हैं? कोर्ट ने साफ तौर पर नाराजगी जताई और ऐसे शब्दों के इस्तेमाल को गलत बताया. पूरी सुनवाई के दौरान कोर्ट का सख्त रुख देखने को मिला. इसके बाद कोर्ट ने साफ तौर पर याचिका को खारिज कर दिया.

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डेटा ज्यादा सटीक होगा इस बार

देश में 2027 में होने वाली 16वीं राष्ट्रीय जनगणना 1931 के बाद पहली बार जाति आधारित व्यापक गणना के साथ होगी. यह देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना भी होगी. इसमें लोगों की जानकारी डिजिटल तरीके से जुटाई जाएगी, जिससे डेटा ज्यादा सटीक होगा.

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By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार प्रभात खबर डिजिटल में Sr. Content writer हैं. पिछले 15 साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं.

अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.

प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है. 📩 संपर्क : amitabh.kumar@prabhatkhabar.in

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