अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही पत्नी संग राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, देशवासियों से शांति के रास्ते पर चलने की अपील

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी मिल गई है. उन्होंने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की और देशवासियों से शांति व अहिंसा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया.

Sonam Wangchuk : सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सोमवार (27 जुलाई 2026 ) को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक उन्होंने अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ दिल्ली के राजघाट पहुंचे. उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की. वांगचुक ने कहा महात्मा गांधी का सत्य और अहिंसा का मार्ग आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सौ साल पहले था.

'लद्दाख में अपनाया, अब पूरे देश में असर देखा'

सोनम वांगचुक ने कहा कि पिछले 5 -6 वर्षों से लद्दाख में उन्होंने गांधीवादी तरीके से अपनी मांगों को उठाया और हमेशा सकारात्मक परिणाम मिले. हालांकि उन्हें यह संदेह था कि क्या यही तरीका राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभावी होगा. लेकिन हालिया आंदोलन के दौरान मिले जनसमर्थन ने उनका भरोसा और मजबूत कर दिया. उन्होंने कहा कि गांधी का रास्ता आने वाले सौ या हजार वर्षों तक भी दुनिया को दिशा देता रहेगा.

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा महात्मा गाँधी का दिखाया मार्ग आज भी उतना ही उपयुक्त है जितना सौ साल पहले था. दरअसल लोग कहते रहे हैं कि ऐसे शासन में और ऐसे शासक के साथ इस तरीके आंदोलन नहीं चलते है. मेरा मानना है कि शासन या शासक से ज्यादा जनता के दिल तक संदेश पहुंचाता है और कोई भी सरकार हो वो जनता की सुनते हैं,चाहे मेरी ना सुने

लोगों से शांति और अहिंसा का संदेश अपनाने की अपील

सोनम वांगचुक ने देश और दुनिया के लोगों से अपील की कि वे अपनी समस्याओं और मांगों को हिंसा नहीं, बल्कि शांति और संवाद के जरिए उठाएं. उन्होंने कहा कि अहिंसा के रास्ते पर समाधान मिलने में समय लग सकता है, लेकिन अंत अंधकार में नहीं होता. पहली कोशिश में सफलता न मिले, फिर भी लगातार प्रयास करने वालों को मंजिल जरूर मिलती है.

लद्दाख आंदोलन से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर

सोनम वांगचुक पिछले कई वर्षों से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के अधिकारों की मांग को लेकर लगातार आंदोलन करते रहे हैं. हाल ही में उनका 26 दिन का अनशन राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना था. तब उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अब स्वस्थ होकर राजघाट पहुंचकर उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतंत्र में सबसे मजबूत आवाज वही है, जो सत्य, अहिंसा और गांधीवादी मूल्यों के साथ उठाई जाए.

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By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

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