दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को कर देगा तबाह, रुद्रम-II मिसाइल का सफल परीक्षण, जानें खूबियां

RudraM II Missile: भारत ने रक्षा क्षेत्र में बड़ी बढ़त हासिल की है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायु सेना (IAF) ने स्वदेशी रूप से विकसित रुद्रम-II एयर-टू-सर्फेस एंटी-रेडिएशन मिसाइल का सफल परीक्षण किया है.

RudraM II Missile: भारत ने डिफेंस सेक्टर में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी रूप से विकसित रुद्रम-2 मिसाइल का सफल परीक्षण कर लिया है. रुद्र एम-II एयर-टू-सर्फेस मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है. मंगलवार को भारतीय वायुसेना ने फाइटर जेट सुखोई-30 एमकेआई से इसका परीक्षण किया. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये परीक्षण अत्यंत कठिन परिस्थितियों में किए गए और इनमें सटीक प्रक्षेप पथ का उपयोग करते हुए सभी उपप्रणालियों की क्षमता का प्रदर्शन किया गया.

दुश्मन की हवाई सुरक्षा को तबाह कर सकता है रुद्र एम

रुद्र एम-II को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली पूरी तरह तबाह कर सकता है. इसे दुश्मन के रडार स्टेशनों, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों, हवाई सुरक्षा नेटवर्क, संचार केंद्रों और रेडियो फ्रीक्वेंसी पैदा करने वाले अन्य सैन्य उपकरणों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है. यह मिसाइल दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को शुरुआती चरण में ही नष्ट कर भारतीय लड़ाकू विमानों के लिए सुरक्षित मार्ग तैयार कर सकती है.

लंबी दूरी से रडार सिस्टम को नष्ट करने में सक्षम

रुद्रम-II को इस ऐसे बनाया गया है कि यह लंबी दूरी से ही दुश्मन के रडार और निगरानी प्रणालियों का पता लगाकर उन्हें नष्ट कर सके. इससे भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान दुश्मन के अत्यधिक सुरक्षित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही उसके रक्षा तंत्र को कमजोर कर सकते हैं.

उन्नत तकनीक से लैस है मिसाइल

मिसाइल में अत्याधुनिक एविएशन सिस्टम और पैसिव होमिंग तकनीक का उपयोग किया गया है. इसकी खासियत यह है कि यदि दुश्मन अपनी पहचान छिपाने के लिए रडार बंद भी कर दे, तब भी यह मिसाइल लक्ष्य का पीछा करना जारी रख सकती है और उसे सटीकता के साथ नष्ट कर सकती है.

भारतीय वायुसेना की ताकत में होगा बड़ा इजाफा

रुद्रम-II के सफल परीक्षण से भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता और मजबूत होगी. यह मिसाइल वर्तमान में इस्तेमाल की जा रही कुछ पुरानी आयातित एंटी-रेडिएशन मिसाइलों का विकल्प बन सकती है, जिससे विदेशी निर्भरता भी कम होगी.

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By Pritish Sahay

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