Ratan Thiyam Death: मणिपुर के मशहूर रंगमंच कलाकार रतन थियम का निधन, लंबे समय से थे बीमार

Ratan Thiyam Death: मणिपुर के प्रसिद्ध रंगमंच कलाकार और ‘पद्मश्री’ से सम्मानित रतन थियम का मंगलवार देर रात एक अस्पताल में निधन हो गया. वह 77 वर्ष के थे.

Ratan Thiyam Death: मशहूर नाटककार रतन थियम लंबे समय से बीमार चल रहे थे. मंगलवार देर रात लगभग डेढ़ बजे क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान में उनका निधन हो गया. मणिपुर सरकार ने थियम के निधन पर शोक व्यक्त किया. सरकार ने एक बयान में कहा, ‘‘हम ‘पद्मश्री’ पुरस्कार विजेता और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता रतन थियम के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं, जो भारतीय रंगमंच की एक प्रमुख हस्ती और मणिपुर के सांस्कृतिक प्रतीक थे.’’ ‘‘हम कला जगत और राष्ट्र के साथ मिलकर उनकी असाधारण विरासत को याद करते हैं. उनके परिवार, शिष्यों और दुनिया भर में उनके प्रशंसकों के प्रति संवेदना जताते हैं.’’

पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने भी थियम के निधन पर जताया दुख

पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने भी थियम के निधन पर दुख व्यक्त किया और कहा कि उनके कार्यों में मणिपुर की आत्मा बसती थी. सिंह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं गहरे दुख के साथ भारतीय रंगमंच के एक सच्चे प्रकाशपुंज और मणिपुर के एक सम्मानित सपूत रतन थियम के निधन पर अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं.’’ पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा, ‘‘अपनी कला के प्रति उनके अटूट समर्पण, उनकी दूरदर्शिता और मणिपुरी संस्कृति के प्रति उनके प्रेम ने न केवल रंगमंच की दुनिया को बल्कि हमारी पहचान को भी समृद्ध किया. उनके काम में मणिपुर की आत्मा बसती है…’’

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1989 में पद्मश्री से सम्मानित हुए थे थियम

मशहूर नाटककार रतन थियम को साल 1989 में ‘पद्मश्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उन्हें पारंपरिक मणिपुरी कला को समकालीन कला, नवाचार और काव्यात्मक कथाओं के साथ मिलाकर नए स्वरूप में पेश करने के लिए जाना जाता था.

नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के निदेशक भी थे रतन थियम

इंफाल के ‘कोरस रिपर्टरी थिएटर’ के संस्थापक रतन थियम ने 1987 से 1988 तक नयी दिल्ली स्थित ‘नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा’ के निदेशक के रूप में भी कार्य किया.

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Published by: Arbindkumar mishra

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झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

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एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

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