Ram Mandir : श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने राम मंदिर दान गबन मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया है. यह जानकारी एएनआई न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से दी है. राम मंदिर दान में गबन की जांच के लिए सरकार ने एसआईटी गठित की थी और एसआईटी द्वारा प्राइमरी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद एफआईआर दर्ज की गई है.
25 जून की रात को दर्ज हुआ एफआईआर
राम मंदिर दान मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं—306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5)—के तहत उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर प्राथमिकी दर्ज की गई है.एफआईआर में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, उनमें अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव तथा अन्य लोग शामिल हैं. जिन आठ आरोपियों के नाम एफआईआर में दर्ज हैं उनकी गिरफ्तारी हो गई है. यह कार्रवाई अयोध्या के पूर्व समाजवादी पार्टी विधायक पवन पांडेय के आरोपों के बाद हुई. उनका यह दावा था कि राम मंदिर की दान राशि में से 7 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये का दुरुपयोग किया गया. इन आरोपों के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने 14 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था.
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सरकार ने कहा-जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर में कथित गबन मामले पर विपक्ष के रुख की आलोचना की. उन्होंने कहा कि जिन्होंने मंदिर निर्माण का विरोध किया था, वे अब राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठा रहे हैं. राज्य सरकार जन-आस्था को चोट पहुंचाने की किसी भी कोशिश के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी. उन्होंने यह बात देवरिया में आयोजित एक जनसभा में कही, जहां वे 456 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 106 विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. राम और अयोध्या से जुड़े मामलों पर सवाल उठाने वालों का उल्लेख करते हुए योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि आपत्ति उठाने वाले लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व और अयोध्या के महत्व को ही नकारते थे. यही वह पक्ष है जिसके लोग जय श्री राम का नारा लगाने वालों पर लाठियां चलाते थे और गोलियां चलवाते थे. जो लोग भगवान राम का नाम लेने भर पर गोली चलाते थे, वही आज कह रहे हैं कि आस्था के साथ छेड़छाड़ हुई है.
