श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया, दान में हुई गड़बड़ी की नैतिक जिम्मेदारी ली

Ram Mandir : अयोध्या राम मंदिर के दान में गबन के आरोपों के बाद से पूरे देश में हड़कंप मचा हुआ है. सरकार विपक्ष के निशाने पर है, हालांकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष से यह कहा है कि वे इस मामले का राजनीतिक लाभ ना उठाएं.

Ram Mandir : श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने राम मंदिर दान गबन मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया है. यह जानकारी एएनआई न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से दी है. राम मंदिर दान में गबन की जांच के लिए सरकार ने एसआईटी गठित की थी और एसआईटी द्वारा प्राइमरी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद एफआईआर दर्ज की गई है.

25 जून की रात को दर्ज हुआ एफआईआर

राम मंदिर दान मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं—306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5)—के तहत उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर प्राथमिकी दर्ज की गई है.एफआईआर में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, उनमें अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव तथा अन्य लोग शामिल हैं. जिन आठ आरोपियों के नाम एफआईआर में दर्ज हैं उनकी गिरफ्तारी हो गई है. यह कार्रवाई अयोध्या के पूर्व समाजवादी पार्टी विधायक पवन पांडेय के आरोपों के बाद हुई. उनका यह दावा था कि राम मंदिर की दान राशि में से 7 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये का दुरुपयोग किया गया. इन आरोपों के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने 14 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था.

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सरकार ने कहा-जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी

शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर में कथित गबन मामले पर विपक्ष के रुख की आलोचना की. उन्होंने कहा कि जिन्होंने मंदिर निर्माण का विरोध किया था, वे अब राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठा रहे हैं. राज्य सरकार जन-आस्था को चोट पहुंचाने की किसी भी कोशिश के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी. उन्होंने यह बात देवरिया में आयोजित एक जनसभा में कही, जहां वे 456 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 106 विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. राम और अयोध्या से जुड़े मामलों पर सवाल उठाने वालों का उल्लेख करते हुए योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि आपत्ति उठाने वाले लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व और अयोध्या के महत्व को ही नकारते थे. यही वह पक्ष है जिसके लोग जय श्री राम का नारा लगाने वालों पर लाठियां चलाते थे और गोलियां चलवाते थे. जो लोग भगवान राम का नाम लेने भर पर गोली चलाते थे, वही आज कह रहे हैं कि आस्था के साथ छेड़छाड़ हुई है.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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