अयोध्या के राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए राम मंदिर उद्घाटन को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि "मंदिर का उद्घाटन अधूरे निर्माण के दौरान किया गया." उन्होंने भगवान राम के अश्वमेध यज्ञ का उल्लेख करते हुए पूछा, "जब भगवान राम ने यज्ञ किया था, तब माता सीता की प्रतिमा उनके साथ थी. मंदिर के उद्घाटन के समय माता सीता कहीं दिखाई नहीं दीं. उस समय राम की सीता कौन थीं और प्रधानमंत्री मोदी की सीता कौन हैं?" इस पर प्रधानमंत्री मोदी को जवाब देना चाहिए. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में SIT से जांच कराने की मांग की है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पहले ही बनी है नई SIT
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन की जांच के लिए इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस किरण एस. की अध्यक्षता में नई SIT का गठन किया है। यह टीम पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी। हालांकि कांग्रेस का कहना है कि निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जानी चाहिए।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि अब तक केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई हुई है, जबकि बड़े स्तर पर कथित गड़बड़ी करने वाले लोग जांच के दायरे से बाहर हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी की जिम्मेदारी नहीं थी तो संबंधित लोगों ने इस्तीफा क्यों दिया. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है.
पहले भी विवादों में रहा है मंदिर ट्रस्ट
राम मंदिर से जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर पहले भी राजनीतिक बहस होती रही है. विपक्ष लगातार पारदर्शिता की मांग करता रहा है, जबकि बीजेपी और मंदिर ट्रस्ट आरोपों को खारिज करते रहे हैं. अब प्रमोद तिवारी के नए बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में आ गया है.
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