Railway: रेलवे सिर्फ ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने पर नहीं बल्कि अपने कामकाज के तरीके में व्यापक बदलाव लाने की दिशा में काम कर रहा है. इसके लिए तकनीक और सुधार को विशेष प्राथमिकता देने पर काम हो रहा है. गुरुवार को रेलवे में सुधार लाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच काे आगे बढ़ाते हुए रेल मंत्रालय ने दो अहम फैसला लिया है. फैसले के तहत रेल में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए टेक पॉलिसी और रेलवे ट्रिब्यूनल में यात्रियों के दावों के निपटारे को आसान बनाने का काम किया गया है.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे में 52 हफ्तों में 52 सुधार करने का संकल्प लिया है और इस कड़ी में रेल सुरक्षा और सुविधा को बेहतर करने का फैसला लिया है. रेल टेक पॉलिसी के तहत रेलवे में नयी तकनीक को अपनाने के लिए स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स को मौका दिया जाएगा. इसके लिए एक डिजिटल रेल टेक पोर्टल बनेगा और पोर्टल पर इनोवेटर सीधे आइडिया जमा कर सकेंगे. खास बात है कि इस पोर्टल पर इनोवेटर्स को एक चरण में ही प्रस्ताव जमा करना होगा. अगर कोई प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है तो ग्रांट पहले की तुलना में तीन गुना अधिक कर दिया गया है. प्रोटोटाइप बनाने और टेस्ट के लिए भी ग्रांट दोगुना कर दिया है ताकि तय प्रोजेक्ट जमीन पर उतर सके.
किन क्षेत्रों में करना होगा काम
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसके लिए कुछ इनोवेशन चैलेंज तय किया है. जैसे हाथियों के ट्रैक पर आने की पहचान करने वाले एआई सिस्टम का विकास, ट्रेन के डिब्बों में आग लगने की शुरुआती चेतावनी के लिए एआई प्रणाली, टूटी पटरी की पहचान के लिए ड्रोन का निर्माण, पटरियों पर दबाव (स्ट्रेस) मॉनिटर करने की तकनीक, पार्सल वैन में सेंसर से वजन मापने की तकनीक का विकास, डिब्बों पर सोलर पैनल लगाने की योजना, कोहरे में रुकावट पहचानने वाली तकनीक, रेल डिब्बों में सफाई की निगरानी के लिए एआई आधारित तकनीक का विकास, एआई के जरिये पेंशन और विवादों का समाधान करने की पहल को प्राथमिकता मिलेगी.
रेल मंत्री ने कहा कि ने हादसे के बाद मुआवजे के दावे की प्रणाली में व्यापक सुधार लाने की पहल की है. अब हादसे के बाद मुआवजा हासिल करना आसान होगा. इसके लिए रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल (आसीटी) में व्यापक बदलाव किया जाएगा. देश में मौजूद 23 आरसीटी पीठ को डिजिटली जोड़ा जाएगा. केस करने और सुनवाई की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी. इससे पीड़ित यात्री कहीं से भी 24×7 मुआवजा संबंधी मामला दर्ज कर सकेंगे. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और मामलों का निपटारा तेज होगा. इसके अलावा रेलवे सुरक्षा पर विशेष जाेर दे रहा है और रेल हादसों को रोकने के लिए कई कदम उठाए है. कैटरिंग सेवा को बेहतर करने के लिए तकनीक के प्रयोग पर जोर दिया जा रहा है.
