हंगामे के वक्त पंजाब कांग्रेस प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल भी मंच पर मौजूद थे. घटना से ठीक एक दिन पहले ही भूपेश बघेल ने राज्य इकाई में किसी भी तरह की गुटबाजी से साफ इनकार किया था.
चन्नी लाओ, पंजाब बचाओ लगे नारे
जैसे ही प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करना शुरू किया, चन्नी समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. कार्यक्रम में "चरणजीत सिंह चन्नी जिंदाबाद", "चन्नी तेरी सोच ते पहरा देवांगे ठोक के" और "चन्नी लाओ, पंजाब बचाओ" के नारे गूंजने लगे. वडिंग ने कार्यकर्ताओं से बार-बार अनुशासन बनाए रखने की अपील की, लेकिन काफी देर तक हंगामा चलता रहा और कार्यक्रम को बीच में ही रोकना पड़ा.
बघेल की चेतावनी, अनुशासनहीनता पर मिलेगी पार्टी से छुट्टी
कार्यक्रम के बाद वरिष्ठ नेताओं ने इस अनुशासनहीनता पर कड़ा रुख अपनाया है. भूपेश बघेल (पंजाब प्रभारी): "हम नारेबाजी करने वाले लोगों की पहचान करेंगे, उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजा जाएगा और नियम अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी." अमरिंदर सिंह राजा वडिंग (प्रदेश अध्यक्ष) ने कहा, "हम जांच कर रहे हैं कि नारे लगाने वाले लोग कांग्रेस के अधिकृत सदस्य थे या नहीं. जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा."
कार्यकर्ताओं की चेतावनी: "पंजाब में अब और प्रयोग न करे हाईकमान"
समाना और नाभा से आए पार्टी कार्यकर्ताओं ने हाईकमान के फैसलों पर खुलकर अपनी भड़ास निकाली.
पार्टी कार्यकर्ता संजीव कुमार (नाभा): "पंजाब में जनता का माहौल कांग्रेस के पक्ष में है, लेकिन हाईकमान को संगठन से जुड़े फैसले लेते समय आम कार्यकर्ताओं की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। अतीत में किए गए राजनीतिक 'प्रयोगों' ने पार्टी को भारी चुनावी नुकसान पहुंचाया है, अब कांग्रेस को ऐसे नए प्रयोगों से बचना चाहिए."
नियुक्ति के बाद से ही गहराया असंतोष
कांग्रेस में असंतोष की यह सुगबुगाहट हाल ही में हुए संगठनात्मक बदलावों के बाद और तेज. हुई है. हाईकमान ने अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को पंजाब अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा, जबकि जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी को प्रचार समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया.
