Private Member’s Bill: शशि थरूर, चन्द्रशेखर आजाद रावण और आलोक कुमार ने पेश किए निजी विधेयक

शुक्रवार को संसद में सदस्यों द्वारा निजी विधेयक पेश किए गए. शशि थरूर ने तीन, चन्द्रशेखर आजाद रावण और जेडीयू के आलोक कुमार ने एक एक विधेयक पेश किया

Private Member’s Bill: नई सरकार में संसद के बजट सत्र के दौरान राजनैतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है. इसी बीच शुक्रवार को कुछ सदस्यों ने प्राइवेट मेंबर विधेयक पेश किए हैं. इसमें शशि थरूर ने तीन प्राइवेट मेंबर बिल, नगीना से सांसद चन्द्रशेखर आजाद रावण प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण का बिल लाया. इनके साथ जेडीयू सांसद आलोक कुमार सुमन ने SC, ST और OBC के लिए अलग विशेष पैकेज के लिए विधेयक पेश किया.

शशि थरूर ने तीन निजी बिल पेश किए

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को तीन निजी विधेयक पेश किए, जिसमें शिक्षण संस्थानों सहित सरकारी प्रतिष्ठानों में सभी श्रेणियों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए 1 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने की बात कही. इसके अलावा उन्होंने तिरुवनंतपुरम में हाई कोर्ट की एक बेंच की मांग की है. इसके बाद शशि थरूर ने संसद में युवाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए जोर दिया. उन्होंने कहा कि लोकसभा में युवाओं का प्रतिशत बेहद कम है. ऐसे में कम से कम 10 सीटें उन युवाओं के लिए अगला होनी जरूरी है जिनकी उम्र 35 साल से नीचे है. उन्होंने आगे कहा कि सांसदों की उम्र में गैप के मामले में हमारे देश का वर्ल्ड रिकॉर्ड है. जिस हिसाब से देश की जनसंख्या में युवाओं का योगदान है उस हिसाब से संसद में उनकी संख्या नहीं है.

चंद्रशेखर आजाद रावण निजी क्षेत्र में की SC, ST समुदाय के लिए आरक्षण की मांग

नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण ने शुक्रवार को लोकसभा में एक निजी विधेयक पेश किया. इस बिल में निजी क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य प्रतिष्ठानों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण की मांग की गई. इस विधेयक में आरक्षण लाभ को निजी क्षेत्र में भी विस्तारित करने का प्रयास किया गया है, जो वर्तमान में केवल सार्वजनिक क्षेत्र तक ही सीमित है. इस बिल में उन संस्थाओं में आरक्षण की बात की गई है जहां कम से कम 20 लोग काम करते हैं और उनमें सरकार का कोई वित्तीय हित नहीं है.

जेडीयू सांसद ने की SC, STऔर OBC के लिए अलग विशेष पैकेज की मांग

जेडीयू सांसद आलोक कुमार सुमन ने भी एक निजी विधेयक पेश किया. जिसमें उन्होंने बिहार में एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के लिए अलग से विशेष पैकेज की मांग की है. आलोक कुमार ने कहा कि, बिहार के लिए स्पेशल पैकेज अलग मामला है. वहीं सामाजिक रू अगला से पिछड़े लोगों को पैकेज दिलाने का मतलब राज्य लेख का विकास है. यह बिहार को दिए गए पैकेज से अलग है. इसके साथ ही आलोक कुमार सुमन ने बिहार में बाढ़ और सूखे के हालात से निपटने के लिए बोर्ड के गठन की मांग भी की है.

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जानें, क्या होता है प्राइवेट मेंबर्स बिल

संसद में पेश होने वाले सार्वजनिक बिल और प्राइवेट मेंबर्स बिल दोनो अलग अलग होते हैं. प्राइवेट मेंबर बिल, संसद के किसी भी सदस्य द्वारा पेश किया जा सकता है. बस यह बिल पेश करने वाला सदस्य वो मंत्री नहीं होना चाहिए. यह बिल केवल केवल शुक्रवार को पेश किया जा सकता है और इसी दिन इसपर चर्चा होती है. वहीं दूसरी तरफ जबकि सरकारी या सार्वजनिक विधेयकों को सरकार के मंत्री पेश करते हैं और ये किसी भी दिन पेश किए जा सकते हैं और इन पर कभी भी चर्चा की सकती है. पब्लिक बिलों को सरकार का समर्थन होता है, जबकि प्राइवेट मेंबर्स बिल के साथ ऐसा नहीं होता है. बताते चलें कि प्राइवेट मेंबर्स बिल सदन में पेश किए जाने लायक हैं या नहीं इसका फैसला लोक सभा अध्यक्ष और राज्य सभा के सभापति करते हैं. पेश होने की अनुमति मिलने के बाद प्राइवेट मेंबर बिल यह समीक्षा के लिए विभिन्न विभागों में जाते हैं. जब वहां से इन बिलों को अनुमोदन मिल जाता है, तब ही ये सदन के पटल पर रखे जाते हैं. गौरतलब है कि संसद के दोनों सदनों से अनुमोदित होने और राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद ही कोई विधेयक, कानून बनता है.

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Published by: Kushal singh

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