विपक्षी एकता पर पीएम मोदी का हमला, ‘गाइत कुछ है माल कुछ है, लेबल कुछ है’ -24 के लिए 26 हुईं हैं पार्टियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बेंगलुरू में जुटे ये लोग एक चेहरे पर कई चेहरे लगाये हुए हैं. पीएम मोदी ने कहा कि कुछ दलों की स्वार्थ भरी राजनीति के कारण विकास का लाभ देश के दूर-दराज वाले इलाकों तक पहुंचा ही नहीं. जनता को इनसे सतर्क रहने की जरूरत है.

गाइत कुछ है, हाल कुछ है, लेबल कुछ है, माल कुछ है, 24 के लिए 26 होने वाले राजनीतिक दलों पर यह गाना बिलकुल फिट बैठता है. अवधी भाषा में लिखी गयी यह कविता बेंगलुरू में आयोजित होने वाली पार्टियों पर फिट बैठती है, क्योंकि इनकी हालत भी कुछ एेसी ही है. जो गाते कुछ हैं, हाल कुछ है, लेबल कुछ और है और माल भी कुछ और है. ये लोग जनता के हित के लिए नहीं जुटे हैं, बल्कि अपना हित साधने के लिए जुटे हैं. इन नेताओं की दुकान पर जातिगत दुष्प्रचार और भ्रष्टाचार स्पष्ट नजर आता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन तीखे शब्दों के साथ आज वीर सावरकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नये टर्मिनल के उद्‌घाटन अवसर पर कही.

विपक्षी एकता के सच को पहचाने जनता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बेंगलुरू में जुटे ये लोग एक चेहरे पर कई चेहरे लगाये हुए हैं. पीएम मोदी ने कहा कि कुछ दलों की स्वार्थ भरी राजनीति के कारण विकास का लाभ देश के दूर-दराज वाले इलाकों तक पहुंचा ही नहीं. जनता को इनसे सतर्क रहने की जरूरत है. जिस परिवार के सभी लोग जमानत पर हों, उनके बारे में क्या कहा जा सकता है. ये लोग लोकतंत्र को बंधक बनाकर रखना चाहते थे. इनके लिए परिवार सबसे ऊपर है. ना खाता ना बही, जो परिवार कहे सब सही. इसलिए जनता को इनका असली चेहरा पहचानने की जरूरत है. इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि जब जनता इन पार्टियों का चेहरा देखती है, तो उन्हें सिर्फ भ्रष्टचार की याद आती है, यही वजह है कि लोकसभा चुनाव 2024 में जनता भाजपा को जिताने का फैसला कर चुकी है.

सात सौ करोड़ की लागत से बनाया गया है टर्मिनल

लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है टर्मिनल के बन जाने से अंडमान और निकोबार द्वीप की यात्रा आसान हो जायेगी और विशेष रूप से इस क्षेत्र में पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलेगा. नये टर्मिनल भवन का निर्माण लगभग सात सौ दस करोड़ रूपये की लागत से किया गया है. यह टर्मिनल अंडमान और निकोबार के संपर्क को बढ़ावा देने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभायेगा. यह टर्मिनल लगभग 40 हजार आठ सौ वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है. नये टर्मिनल भवन में सालाना लगभग 50 लाख यात्रियों के प्रबंधन की क्षमता है. इस हवाई अड्डे में एक बार में 10 विमान को पार्किंग की सुविधा मिलेगी, जिसकी लागत लगभग 80 करोड़ रुपये है.

कांग्रेस सिर्फ परिवार का भला चाहती है

पिछली सरकार पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पिछली सरकार के नौ साल में अंडमान निकोबार में करीब 28 हजार घरों को पानी के कनेक्शन से जोड़ा गया था, लेकिन हमारी सरकार ने नौ साल में 50 हजार से अधिक परिवारों को यह सुविधा दी गयी है. लंबे समय तक भारत में विकास का दायरा कुछ बड़े शहरों और कुछ क्षेत्रों तक सीमित रहा, लेकिन अब परिस्थिति अलग है. अब सरकार सबका साथ और सबका विकास चाहती है. कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ये दल उन्हीं कामों को प्राथमिकता देते थे, जिसमें इनका खुद का भला हो, इनके परिवार का भला हो. नतीजा ये हुआ कि हमारे आदिवासी क्षेत्रों और द्वीपों की जनता विकास से वंचित रही, विकास के लिए तरसती रही.

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2024 में बीजेपी को सत्ता से बाहर करना विपक्ष का उद्देश्य

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव2024 मेंनरेंद्र मोदी सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए विपक्ष एकजुट हो रहा है. इसके लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहल की और पटना में 15 विपक्षी दलों को एक मंच पर लेकर आये और अब बेंगलुरु में 24 पर्टियां 17 जुलाई से मंथन कर रही हैं. विपक्ष की यह बैठक बहुत ही खास है क्योंकि इस बैठक में तमाम दिग्गज जुट रहे हैं. विपक्ष का मनोबल बढ़ाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी बेंगलुरु बैठक का हिस्सा बनीं. तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी भी इस बैठक में अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ शामिल हुईं हैं. विपक्ष के महागठबंधन पर सत्तापक्ष लगातार हमलावर रहा है और यह कहता रहा है कि विपक्ष का महागठबंधन महज स्वार्थी लोगों का एक ग्रुप है जहां सब के सब अपना हित साधने के लिए इकट्ठे हुए हैं. बेंगलुरु में विपक्ष की बैठक से पहले कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि विपक्ष इसे महागठबंधन बता रहा है लेकिन दरअसल यह कोई गठबंधन नहीं है इनका एक मात्र उद्देश्य है पीएम मोदी को सत्ता से हटाना. लेकिन इनका यह सपना सच होने वाला नहीं है क्योंकि जीरो से अगर जीरो को जोड़ा जायेगा तो नतीजा सिफर ही रहेगा.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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