संसद का शीतकालीन सत्र 4 दिसंबर से, सरकार ने सूचीबद्ध किये 18 विधेयक, देखें सूची

संसद का शीतकालीन सत्र 4 दिसंबर से शुरू होकर 22 दिसंबर तक चलेगा. भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को स्थानापन्न करने वाले विधेयक-भारतीय न्याय संहिता विधेयक, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक और भारतीय साक्ष्य विधेयक चर्चा और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किये गये हैं.

सरकार ने अगले सप्ताह शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र के लिए बुधवार को 18 विधेयक सूचीबद्ध किये, जिनमें महिला आरक्षण अधिनियम के प्रावधानों को जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी तक बढ़ाने संबंधी दो तथा आपराधिक कानूनों को बदलने के लिए तीन विधेयक शामिल हैं.

जम्मू-कश्मीर विधानसभा सीट की संख्या बढ़ाने को लेकर विधेयक लाने की तैयारी

लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, सरकार एक ऐसा विधेयक लाने की भी योजना बना रही है, जिसमें प्रवासी कश्मीरियों, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से विस्थापित व्यक्तियों तथा अनुसूचित जनजातियों को प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए जम्मू और कश्मीर विधानसभा में सीट की संख्या 107 से बढ़ाकर 114 करने का प्रावधान हो. सरकार ने सत्र के दौरान विधेयकों के अलावा 2023-24 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों के पहले बैच को चर्चा और मतदान के वास्ते सूचीबद्ध किया है.

संसद का शीतकालीन सत्र 4 दिसंबर से

संसद का शीतकालीन सत्र चार दिसंबर से शुरू होकर 22 दिसंबर तक चलेगा. भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को स्थानापन्न करने वाले विधेयक-भारतीय न्याय संहिता विधेयक, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक और भारतीय साक्ष्य विधेयक लोकसभा में चर्चा और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किये गये हैं. तीनों विधेयकों की समीक्षा गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति द्वारा की गई है, जिसने विपक्षी सदस्यों के असहमति नोट के साथ अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है.

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ये विधेयक किए गए सूचीबद्ध

लोकसभा में पेश करने के लिए सूचीबद्ध नए विधेयक हैं- बॉयलर विधेयक, करों का अस्थायी संग्रह विधेयक, केंद्रीय वस्तु और सेवा कर (दूसरा संशोधन) विधेयक तथा जम्मू एवं कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक. केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) दूसरा (संशोधन) विधेयक तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक भी नये विधेयकों में शामिल हैं.

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