भारी बारिश से हाहाकार, पीएम मोदी ने की समीक्षा, अरविंद केजरीवाल ने कहा-तबाही के लिए दिल्ली नहीं थी तैयार

पीएमओ के ट्वीट में यह जानकारी भी दी गयी है कि प्रभावित राज्यों में प्रशासन मुस्तैद है और एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीम काम कर रही है. ज्ञात हो कि रविवार से हो रही भारी बारिश के बाद उत्तर भारत के कई राज्यों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गयी है.

देश में रविवार से हो रही भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति काफी गंभीर हो गयी है. इसे देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बातचीत की और स्थिति की समीक्षा की. इस संबंध में पीएमओ की ओर से ट्वीट कर जानकारी दी गयी है.

पीएम मोदी ने की समीक्षा बैठक

पीएमओ के ट्वीट में यह जानकारी भी दी गयी है कि प्रभावित राज्यों में प्रशासन मुस्तैद है और एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीम काम कर रही है. ज्ञात हो कि रविवार से हो रही भारी बारिश के बाद उत्तर भारत के कई राज्यों खासकर हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गयी है. हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं भी हुई हैं.


40 साल में इतनी बारिश नहीं हुई थी

दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने और जगह-जगह पर जल- जमाव को देखते हुए दिल्ली सरकार ने स्थिति की समीक्षा की और मुख्यमंत्री ने बयान जारी कर कहा कि पिछले 40 साल में राजधानी दिल्ली में इतनी बारिश नहीं हुई है. इतनी बारिश के बाद उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए सरकार तैयार नहीं थी.


यह राजनीति का समय नहीं, साथ आकर काम करें

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह राजनीति का वक्त नहीं है. सभी को साथ आकर काम करने की जरूरत है, ताकि आम आदमी को राहत मिल सके. उन्होंने जानकारी दी कि यमुना नदी का जल स्तर बढ़ने और रेड अलर्ट जारी किये जाने के बाद वे केंद्रीय जल आयोग के संपर्क में हैं. बाढ़ की स्थिति नहीं होगी ऐसी उम्मीद जतायी जा रही है. लेकिन अगर पानी 206 मीटर के निशान को पार कर जायेगा तो हम नदी किनारे बसे लोगों को वहां से सुरक्षित स्थान पर ले जाने का काम शुरू कर देंगे.

दिल्ली में जलजमाव से भारी परेशानी

अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली में सड़क धंसने की जो घटनाएं हुई हैं उनकी जांच के आदेश दे दिये गये हैं. इन गड्ढों की वजह से कोई दुर्घटना ना हो इसके लिए सरकार ने गड्ढों को भरने के आदेश दे दिये हैं. ज्ञात हो कि भारी बारिश की वजह से दिल्ली में कई जगह पर जलजमाव की स्थिति है और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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