ओडिशा रेल हादसे के बाद सभी जोन में सुरक्षा अभियान चलाने का आदेश, 14 जून तक सौंपनी होगी रिपोर्ट

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दुर्घटना के असल कारण का पता लगा लिया गया है और इसके लिए जिम्मेदार अपराधियों की पहचान कर ली गई है. उन्होंने कहा, हादसा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और प्वाइंट मशीन में किए गए बदलाव के कारण हुआ.

ओडिशा के बालासोर में भीषण रेल हादसे के बाद रेलवे बोर्ड ने सोमवार को भारतीय रेलवे के सभी 19 जोनों को तुरंत सुरक्षा अभियान शुरू करने का निर्देश दिया. ओडिशा रेल हादसे में 275 लोगों की मौत हो गयी, जबकि 1100 से अधिक लोग घायल हो गये.

14 जून तक सौंपनी होगी रिपोर्ट

बालासोर रेल हादसे के बाद रेलवे ने सुपर चेक अभियान के तहत सभी 19 जोनों में सुरक्षा की स्थिति का जायजा लेने का निर्देश दिया गया है. रेलवे ने 14 जून को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. सभी जोन को सुरक्षा अभियान के दौरान सभी कमियों और अनियमितताओं को रिकॉर्ड करना होगा.

हाउसिंग सिग्नलिंग उपकरण की जांच का भी दिया निर्देश

TOI की खबर के अनुसार कार्यकारी निदेशक सुरक्षा तेज प्रकाश अग्रवाल ने सभी जोन को निर्देश दिया कि वे स्टेशन की सीमा के भीतर सभी गुमटी (छोटी दुकान) हाउसिंग सिग्नलिंग उपकरण की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि डबल लॉकिंग व्यवस्था हो. साथ ही स्टेशनों के सभी रिले रूमों की जांच करने का भी निर्देश दिया गया है कि ‘डबल लॉकिंग अरेंजमेंट’ सही काम कर रही है या नहीं. इसकी भी जांच करने के लिए कहा गया है कि रिले रूम के दरवाजे खोलने और बंद करने के लिए डेटा लॉगिंग और एसएमएस अलर्ट हो.

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क्या है रिले रूम

दरअसल रिले रूम वातानुकूलित इनडोर सिस्टम है, जिसमें रेल ट्रैक से सभी सिग्नलिंग केबल समाप्त हो जाते हैं, और कमरे को संचालित करने के लिए ट्रैक की स्पष्ट तस्वीर देने के लिए सहायक स्टेशन प्रबंधक (एएसएम) पैनल से जुड़ते हैं. रिले रूम में दो अलग-अलग ताले होते हैं, एक की चाबी एएसएम के पास रहती है, जबकि दूसरी सिग्नल और टेलीकम्युनिकेशन (एसएंडटी) टीम के पास रहती है. अगर सिग्नल में कोई खराबी आती है, तो फिर इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल मेंटेनर (ईएसएम) एएसएम को एक डिस्कनेक्शन मेमो देते हैं और खराबी को सुधारने के लिए रिले रूम को खोलते हैं.

रेलवे ने तोड़फोड़, इंटरलॉकिंग प्रणाली से छेड़छाड़ की संभावना का दिया संकेत

रेलवे ने ओडिशा ट्रेन हादसे में चालक की गलती और प्रणाली की खराबी की संभावना से इनकार कर दिया है. साथ ही संभावित तोड़फोड़ और ‘इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग’ प्रणाली से छेड़छाड़ का संकेत दिया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दुर्घटना के असल कारण का पता लगा लिया गया है और इसके लिए जिम्मेदार अपराधियों की पहचान कर ली गई है. उन्होंने कहा, हादसा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और प्वाइंट मशीन में किए गए बदलाव के कारण हुआ.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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