Neet Exam : गड़बड़ी पाई गई तो एनटीए में जवाबदेही तय होगी, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा

धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षार्थियों और अभिभावकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि किसी को डरने की जरूरत नहीं है, किसी के भी करियर को दांव पर नहीं लगाया जाएगा.

Neet Exam : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से शुक्रवार को नीट के परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों ने मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने पीटीआई न्यूज एजेंसी के साथ बातचीत में कहा कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, यदि कोई गड़बड़ी नजर आई तो इसके लिए एनटीए में जवाबदेही तय की जाएगी.नीट की परीक्षा में टाॅपर्स की संख्या में वृद्धि पर उन्होंने कहा कि इसकी वजह संभवत: यह हो सकती है कि एनसीईआरटी के तर्कसंगत पाठ्यक्रम के अनुसार नीट के सिलेबस को कम किया गया और प्रश्न राज्य बोर्ड के सिलेबस के अनुसार पूछे गए.

कट-ऑफ और रैंक वन पाने वालों की संख्या बढ़ी

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कट-ऑफ और रैंक वन पाने वालों की संख्या बढ़ रही है, क्योंकि अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ गई है, जिसकी वजह से कंपीटिशन बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि छात्रों की चिंता को सरकार समझती है और पूरी निष्पक्षता के साथ न्याय होगा. गुरुवार को भी शिक्षा मंत्री ने यह कहा था कि किसी भी परीक्षार्थी को घबराने की जरूरत नहीं है. उनके साथ न्याय करना सरकार और एनटीए की जिम्मेदारी है. उन्होंने यह भी कहा था कि पेपरलीक के कोई प्रमाण अबतक नहीं मिले हैं. साथ ही धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा था कि एनटीए एक प्रामाणिक संस्था है.

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एनटीए ने ग्रेस मार्क्स को रद्द किया

ज्ञात हो कि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एनटीए ने यह कहा कि उसने ग्रेस मार्क्स को रद्द कर दिया है. एनटीए ने यह बताया कि 1563 बच्चों का स्कोरकार्ड रद्द किया गया है. जिन बच्चों का स्कोरकार्ड रद्द हुआ है उन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी. जो बच्चे परीक्षा में उपस्थित नहीं होंगे उन्हें बिना ग्रेस मार्क्स के ही काउंसलिंग में शामिल होना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान यह कहा कि काउंसलिंग नहीं रोकी जाएगी और नीट से संबंधित तमाम याचिकाओं पर आठ जुलाई को सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट ने आज एनटीए और केंद्र सरकार को नोटिस भी किया है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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