Muslim : जानें कितने मुसलमान रहते हैं महाराष्ट्र में, चुनाव के पहले उठी अधिकार की मांग

Muslim : महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के पहले मुसलमानों को उनके अधिकार की याद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने दिलाई है. जानें क्या कहा

Muslim : महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के पहले बयान बाजी का दौर जारी है. इस क्रम में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि सूबे में हम अपने बल पर चुनाव लड़ रहे हैं. एआईएमआईएम का मानना ​​है कि भारतीय राजनीति तब मजबूत होगी जब मुसलमानों को उनकी आबादी के बराबर अधिकार मिल जाएगा. उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारतीय संसद में केवल 4% मुस्लिम सांसद हैं. हमारा पूरा प्रयास है कि एकनाथ शिंदे, फडणवीस, अजित पवार की सरकार दोबारा प्रदेश में न बने.

महाराष्ट्र में कितनी है मुस्लिमों की आबादी

एक आंकड़े के अनुसार 1.30 करोड़ की आबादी के साथ मुसलमान महाराष्ट्र की आबादी का 11.56% हिस्सा हैं. उत्तरी कोंकण, खानदेश, मराठवाड़ा और पश्चिमी विदर्भ में उनकी संख्या ज्यादा देखने को मिलती है. 1960 में अस्तित्व में आने वाले महाराष्ट्र में मुस्लिम सांसदों की संख्या कभी भी राज्य में उनकी आबादी के अनुपात में नहीं दिखी. पिछले 64 वर्षों में प्रदेश से चुने गए 614 लोकसभा सांसदों में से केवल 15 या 2.5% से कम मुस्लिम रहे.

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कब है महाराष्ट्र में मतदान

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को मतदान होंगे जबकि मतों की गिनती 23 नवंबर को होगी. इसके बाद ही पता चलेगा कि प्रदेश में किसकी सरकार बनेगी.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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