मुंबई में मंगलवार (23 जून) रात 22 वर्षीय मयंक लोहार काम खत्म कर अंधेरी स्टेशन से विरार जाने के लिए लोकल ट्रेन में सवार हुए थे. उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही मिनटों में उनकी जिंदगी बदल जाएगी. ट्रेन के बोरीवली पहुंचने तक उन पर कई बार चाकू से हमला किया जा चुका था. पुलिस के मुताबिक, भारी बारिश के दौरान ट्रेन का दरवाजा खुला रखना है या बंद, इसी बात को लेकर यात्रियों के बीच बहस शुरू हुई थी. देखते ही देखते यह विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हिंसा में बदल गया और एक युवक की जान चली गई.
22 साल के मयंक लोहार अंधेरी वेस्ट स्थित वेस्टसाइड स्टोर में सेल्समैन के तौर पर काम करते थे. मंगलवार रात अपनी ड्यूटी खत्म करने के बाद वह रात 10:42 बजे अंधेरी स्टेशन से चर्चगेट-नालासोपारा फास्ट लोकल में घर लौटने के लिए सवार हुए थे. मंगलवार को ही मुंबई में मॉनसून ने दस्तक दी थी. शहर के कई इलाकों में तेज बारिश हुई, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. रात के समय घर लौटने की जल्दी में बड़ी संख्या में यात्री लोकल ट्रेनों में सवार थे और डिब्बों में काफी भीड़ थी.
किस बात को लेकर हुई मयंक लोहार और सुवर्णा के बीच बहस?
जांचकर्ताओं के मुताबिक, भीड़ से भरे फर्स्ट क्लास डिब्बे में मयंक लोहार दरवाजे के पास खड़े थे. उसी जगह 30 साल का सुवर्णा नाम का एक अन्य यात्री भी मौजूद था. पुलिस के अनुसार, दोनों के बीच यहीं से विवाद की शुरुआत हुई. इसके बाद डिब्बे का दरवाजा खुला रखा जाए या बंद, इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई. देखते ही देखते यह कहासुनी बढ़ती चली गई और मामला गंभीर विवाद में बदल गया.
मयंक के सीने और पेट में कई वार किए गए
पुलिस के मुताबिक, ट्रेन के दरवाजे को लेकर विवाद शुरू हुआ था. एक यात्री दरवाजा खुला रखना चाहता था, जबकि दूसरा बारिश का पानी डिब्बे में आने से परेशान था और दरवाजा बंद करने की बात कह रहा था. अंधेरी से बोरीवली के बीच दोनों के बीच बहस लगातार बढ़ती गई. आरोप है कि इसी दौरान सुवर्णा ने अपने पास रखी धारदार चीज निकाली और मयंक पर हमला कर दिया. हमले में मयंक के सीने और पेट में कई वार किए गए, जिसके बाद वह डिब्बे में ही गिर पड़े.
बताया जा रहा है कि रात 11:04 बजे ट्रेन बोरीवली स्टेशन पहुंची. पुलिस के मुताबिक, आरोपी सुवर्णा ट्रेन के पूरी तरह रुकने से पहले ही डिब्बे से कूद गया और स्टेशन पर मौजूद भीड़ में फरार हो गया.
