मानसून पर संकट? IMD ने जताई कम बारिश की आशंका, अल नीनो का असर!

IMD Monsoon Forecast: भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस साल जून से सितंबर तक चलने वाले मानसून सीजन में देश में औसतन लगभग 92% बारिश होने की संभावना है. यानी इस साल सामान्य से करीब 8 फीसदी कम बारिश हो सकती है. 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर देश में मानसून की औसत बारिश लगभग 87 सेंटीमीटर मानी जाती है.

IMD Monsoon Forecast: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस साल मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई है. मौसम विभाग के अनुसार, जून से सितंबर तक चलने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून देश में औसत से थोड़ा कमजोर रह सकता है. IMD के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्र के मुताबिक, इस साल कुल बारिश लगभग 80 सेंटीमीटर रहने का अनुमान है, जबकि 1971 से 2020 तक का दीर्घकालिक औसत (LPA) 87 सेंटीमीटर है. इसका मतलब है कि बारिश में लगभग 92 प्रतिशत तक की संभावना है, जिसमें 5 प्रतिशत ऊपर-नीचे का अंतर हो सकता है.

अल नीनो के कारण हो सकती है कम बारिश!

मौसम विभाग के मुताबिक सामान्य से कम बारिश का एक कारण अल नीनो की स्थिति का सामने आना हो सकता है. इसके कारण बारिश में गिरावट आ सकती है. आईएमडी के अनुसार, जलवायु मॉडल संकेत देते हैं कि जून के आसपास अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना है. फिलहाल भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में कमजोर ला नीना की स्थिति धीरे-धीरे खत्म होकर सामान्य जलवायु स्थिति में बदल रही है. साथ ही, जलवायु मॉडल साफ हो रहा है कि मानसून के दूसरे चरण में पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (PIOD) की स्थिति विकसित हो सकती है.

पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल क्या होता है?

पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल का अर्थ है हिंद महासागर के पश्चिमी भाग (अफ्रीकी तट) का सामान्य से अधिक गर्म होना और पूर्वी भाग (इंडोनेशिया) का ठंडा होना. इस स्थिति में हवाएं पूर्व से पश्चिम (बंगाल की खाड़ी से अरब सागर) की ओर चलती हैं. इससे हिंद महासागर में समुद्र के तापमान में ऐसा बदलाव हो सकता है, जिससे मौसम पर असर पड़ेगा और बारिश के तरीके में परिवर्तन आ सकता है.

बर्फबारी और मानसून का संबंध

डॉ. महापात्र ने कहा- पॉजिटिव आईओडी से अधिक बारिश होती है. इसलिए हमें उम्मीद है कि यह मानसून के दूसरे चरण में अल नीनो के प्रभाव को कम करने में सहायक होगा. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साल की तुलना में, उत्तरी गोलार्द्ध में पिछले तीन महीनों (जनवरी से मार्च) के दौरान हिमपात का क्षेत्र सामान्य से थोड़ा कम रहा. जब उत्तरी गोलार्द्ध में सर्दी और वसंत के दौरान बर्फ ज्यादा गिरता है, तो उसके बाद भारत में मानसून की बारिश आमतौर पर कम हो सकती है, और अगर बर्फ कम हो तो बारिश अधिक होने की संभावना रहती है. आईएमडी मानसून की बारिश का पहला पूर्वानुमान अप्रैल के मध्य में जारी करता है और मई के अंतिम सप्ताह में अपडेट पूर्वानुमान जारी करता है.

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लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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