आखिर क्यों अपनी मां का नाम बदलवाना चाहती हैं महबूबा मुफ्ती की बेटी ?

mehbooba mufti , pdp: आखिर क्यों अपनी मां का नाम बदलवाना चाहती हैं महबूबा मुफ्ती की बेटी ? यह सवाल सबके मन में आ रहा है. दरअसल, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की छोटी बेटी ने अपने पासपोर्ट में अपनी मां का नाम बदलकर महबूबा सैयद करने की मांग की है. इस संबंध में इर्तिका जावेद ने एक स्थानीय समाचार पत्र में एक सूचना प्रकाशित कराई थी.

आखिर क्यों अपनी मां का नाम बदलवाना चाहती हैं महबूबा मुफ्ती की बेटी ? यह सवाल सबके मन में आ रहा है. दरअसल, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की छोटी बेटी ने अपने पासपोर्ट में अपनी मां का नाम बदलकर महबूबा सैयद करने की मांग की है. इस संबंध में इर्तिका जावेद ने एक स्थानीय समाचार पत्र में एक सूचना प्रकाशित कराई थी. सूचना के अनुसार, मैं इर्तिका जावेद पुत्री जावेद इकबाल शाह, निवासी फेयरव्यू हाउस गुपकर रोड, श्रीनगर, कश्मीर-190001, अपने पासपोर्ट में अपनी मां का नाम महबूबा मुफ्ती से बदलकर महबूबा सैयद कराना चाहती हूं….

नोटिस में लिखा गया है, अगर किसी को इस बारे में कोई आपत्ति है तो कृपया सात दिन की अवधि के भीतर संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं. उसके बाद किसी आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा. आपको बता दें कि महबूबा मुफ्ती और उनके पति साथ नहीं रहते हैं. इन दंपती की दो बेटियां इल्तिजा और इर्तिका हैं. बड़ी बेटी ने अपनी मां के नक्शेकदम पर चलते हुए मुफ्ती उपनाम अपनाया है, जबकि छोटी बेटी अपने पिता के करीब लगती हैं. गौर हो कि महबूबा फिलहाल अपने सरकारी आवास पर नजरबंद हैं.

5 नवंबर तक हिरासत में : पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया. अब वे 5 नवंबर तक हिरासत में रहेंगी. उल्लेखनीय है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही वे नजरबंदी में है. पिछले महीने पूर्व मंत्री और पीपुल्स कांफ्रेंस प्रमुख सज्जाद गनी लोन को 360 दिनों बाद नजरबंदी से रिहा कर दिया गया.

कई नेता लिए गए थे हिरासत में : यदि आपको याद हो तो जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधान खत्म करने के दिन 5 अगस्त 2019 को सरकार ने तमाम राजनेताओं को हिरासत में लिया था. इस दौरान पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, डा. फारूख अब्दुल्ला सहित कई अन्य राजनेता भी हिरासत में लिए गए थे. बीते दिनों उमर, फारूक समेत कई नेताओं को रिहा कर दिया गया था, लेकिन महबूबा व शाह फैसल अब भी हिरासत में ही हैं.

Posted By : Amitabh Kumar

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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