मणिपुर वीडियो मामला: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, घटना 4 मई को हुई तो, 14 दिन बाद FIR क्यों?

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने मणिपुर वीडियो मामले में दर्ज प्राथमिकी को मजिस्ट्रेट कोर्ट में स्थानांतरित करने की बात भी नाराजगी दिखाई. कोर्ट ने मणिपुर सरकार से पूछा, पुलिस क्या कर रही थी? वीडियो मामले में प्राथमिकी 24 जून को मजिस्ट्रेट कोर्ट में क्यों स्थानांतरित की गई?

मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर सड़क पर परेड़ कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाया. कोर्ट ने पूछा, जब घटना 4 मई को हुई, तो 14 दिनों के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज क्यों की. इस मामले में मंगलवार को भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी.

पुलिस क्या कर रही थी?

मणिपुर वायरल वीडियो मामले में सुनवाई के दौरान सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने सरकार से पूछा कि पुलिस को जीरो एफआईआर दर्ज करने में 14 दिन क्यों लगे. वायरल वीडियो पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि जब घटना 4 मई को हुई तो FIR 18 मई को क्यों दर्ज की गई? 4 मई से 18 मई तक पुलिस क्या कर रही थी? यह घटना सामने आई कि महिलाओं को नग्न कर घुमाया गया और दो के साथ बलात्कार किया गया. पुलिस क्या कर रही थी? मालूम हो 19 जुलाई को सोशल मीडिया में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने का वीडियो सामने आने के बाद देश-दुनिया में इस घटना के बारे में जानकारी हुई. बाद में पता चला की 3 मई को हिंसा शुरू होने के अगले ही दिन 4 मई को घटना हुई थी.

जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाई जाएगी

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मणिपुर वायरल वीडियो मामले की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाई जाएगी. जिसमें रिटायर्ड महिला जज होंगी. सीजेआई ने कहा, इसके लिए सरकार नाम सुझा सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा मणिपुर वीडियो मामले में कितनी प्राथमिकियां दर्ज की गईं ?

सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया, मणिपुर में महिलाओं के खिलाफ हिंसा को लेकर मई से कितनी प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं. साथ ही कोर्ट ने मणिपुर में महिलाओं के खिलाफ हिंसा से निपटने के लिए व्यापक तंत्र विकसित करने का आह्वान किया.

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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने क्या कहा?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का कहना है कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है. यह अदालत स्थिति पर नजर रख सकती है. उन्होंने आगे कहा, यहां या वहां से आने वाली कोई भी चीज खतरनाक होगी. मणिपुर हिंसा मामले में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ से कहा, यदि सुप्रीम कोर्ट जांच की निगरानी करता है तो भारत सरकार को कोई आपत्ति नहीं है.

वीडियो मामले में प्राथमिकी मजिस्ट्रेट कोर्ट में स्थानांतरित करने की बात पर भड़के सीजेआई

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने मणिपुर वीडियो मामले में दर्ज प्राथमिकी को मजिस्ट्रेट कोर्ट में स्थानांतरित करने की बात भी नाराजगी दिखाई. कोर्ट ने मणिपुर सरकार से पूछा, पुलिस क्या कर रही थी? वीडियो मामले में प्राथमिकी 24 जून को मजिस्ट्रेट कोर्ट में क्यों स्थानांतरित की गई? इसपर केंद्र सरकार की ओर से बताया गया, मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र करके घुमाने संबंधी मामले की सुनवाई असम में स्थानांतरित करने का अनुरोध कभी नहीं किया गया.

मणिपुर हिंसा की एसआईटी जांच के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा पर दायर एक नयी जनहित याचिका पर विचार करने से सोमवार को इनकार कर दिया. इस याचिका में राज्य में जातीय हिंसा के अलावा पोस्ते की कथित खेती और नार्को-आतंकवाद सहित अन्य मुद्दों की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने का अनुरोध किया गया था. शीर्ष अदालत ने कहा कि इस जनहित याचिका पर विचार करना बहुत कठिन है, क्योंकि इसमें केवल एक समुदाय को दोषी ठहराया गया है.

मैतेई की ओर से माधवी दीवान ने याचिका वापस लेने का किया था अनुरोध

याचिकाकर्ता मायांगलमबम बॉबी मैतेई की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने याचिका वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया. प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, इस जनहित याचिका पर विचार करना बहुत कठिन है, क्योंकि इसमें केवल एक समुदाय को दोषी ठहराया गया है. पीठ ने कहा,आप एक अधिक विशिष्ट याचिका के साथ आ सकते हैं. इस याचिका में हिंसा से लेकर मादक पदार्थों और पेड़ों की कटाई सहित सभी मुद्दे शामिल हैं.

माधवी दीवान ने हिंसा के लिए सीमा पार आतंकवाद और पोस्ते की खेती को जिम्मेदार ठहराया

दीवान ने मणिपुर में हाल की हिंसा के लिए सीमा पार आतंकवाद और राज्य में पोस्ते की खेती को जिम्मेदार ठहराया था. याचिका में स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी), राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के साथ-साथ राज्य सरकार सहित अन्य को पक्षकार बनाया गया था. पीठ के समक्ष मणिपुर हिंसा के कई पहलुओं से संबंधित अन्य याचिकाएं भी विचाराधीन हैं.

मणिपुर हिंसा मामले में अबतक 160 लोगों की मौत

गौरतलब है कि मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद राज्य में भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

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By Arbindkumar mishra

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