एलपीजी की कीमत में वृद्धि पर भड़के खरगे, बीजेपी नेताओं से पूछा-अब क्यों सिलेंडर लेकर सड़क पर नहीं बैठ रहे?

LPG Price Hike : पश्चिम एशिया में संकट के बीच एलपीजी की कीमत में रविवार को 29 रुपए की बढ़ोतरी करके मोदी सरकार एक बार फिर विपक्ष के निशाने पर है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी के नेताओं से यह सवाल पूछा है कि अब वे क्यों सिलेंडर लेकर सड़क पर नहीं बैठ रहे हैं.

LPG Price Hike : एलपीजी की कीमत में वृद्धि पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर मोदी सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने रविवार को घरेलू गैस की कीमतों में वृद्धि को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला किया और तीन सवाल पूछे हैं. उन्होंने कहा कि यूपीए की सरकार के दौरान महंगाई को लेकर हो-हल्ला करने वाले बीजेपी के नेता अब क्यों चुप हैं.

खरगे ने पूछा सवाल-मोदी जी के दावों का क्या हुआ?

मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने पोस्ट में लिखा है कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में पश्चिम एशिया संघर्ष के जवाब में 41 देशों में ईंधन के स्रोत होने के बड़े-बड़े दावे किए थे, उनका क्या हुआ? उन्होंने पूछा कि आज भी ग्रामीण इलाकों में एलपीजी की कमी क्यों है. कांग्रेस अध्यक्ष की यह टिप्पणी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़ाकर 942 रुपये करने के बाद आई है. खरगे ने एक्स पर लिखे पोस्ट में कहा-घरेलू एलपीजी के दामों में आग की लपटें आम जनता की रसोई को भस्म करने पर तुली हुई हैं. मोदी सरकार ने पिछले 4 महीनों में घरेलू रसोई गैस की कीमत में 89 रुपये की बढ़ोतरी की है.

खरगे ने पूछे तीन सवाल

खरगे ने मोदी सरकार से तीन सवाल पूछे हैं. उन्होंने कहा कि हमारे तीन सवाल हैं. पहला सवाल यह है कि संसद में मोदी जी ने लंबे-चौड़े दावे किए थे कि वह पश्चिम एशिया युद्ध के चलते 41 देशों से ईंधन प्राप्त कर रहे हैं. उसका क्या हुआ? ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी एलपीजी की किल्लत क्यों है? दूसरा सवाल यह है कि 2025-26 में उज्ज्वला योजना में 5.56 करोड़ परिवारों ने केवल एक या एक भी रिफिल नहीं करवाया. इनमें से 3.30 करोड़ ने तो एक भी सिलेंडर रिफिल नहीं लिया. यह तो पश्चिम एशिया संकट के पहले की बात है. क्या यह मोदी सरकार की लूट का नतीजा नहीं है? तीसरा सवाल यह है कि मोदी जी और बीजेपी के नेता यूपीए सरकार के दौरान महंगाई का शोर मचाते थे. क्या ये सच नहीं है कि मोदी सरकार ने 12 सालों में घरेलू एलपीजी के दामों में 530 रुपये की बढ़ोतरी की है? अब भाजपा के नेता सड़कों पर सिलेंडर लेकर क्यों नहीं बैठ रहे हैं?

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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